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गरीबी हमारी नाकामी, लोकतंत्र सहारा

नोट फॉर वोट और कदाचार के बढ़ते किस्सों के बावजूद उत्तर भारत के प्रमुख शहरों में रहने वालों का निगाह में आजादी के 61 वर्षो की सबसे बड़ी उपलब्धि हमारा लोकतंत्र है। इसके साथ वैज्ञानिक प्रगति को भी वे बराबरी की उपलब्धि मानते हैं। उनकी निगाह में सबसे बड़ी विफलता गरीबी और असमानता है। दूसरे नम्बर की विफलता निकृष्ट शिक्षा व्यवस्था है। उनका सबसे बड़ा सपना है प्रत्येक व्यक्ित को बेहतरीन शिक्षा-व्यवस्था होना। दूसे नम्बर का सपना है मानव-विकास के मामले में भारत दुनिया के शिखर पर हो।ड्ढr ड्ढr बासठवें स्वतंत्रता दिवस के दो सप्ताह पहले कराए गए हिन्दुस्तान सी फोर सर्वे के परिणामों को गौर से देखने पर यह भी पता लगता है कि लोकतंत्र को सबसे बड़ी उपलब्धि मानने वाले लोग 35 से 50 की उम्र वाले हैं। 50 से ऊपर उम्र वाले लोगों की निगाह में हरित क्रांति हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। लोकतंत्र को वे दूसरे नम्बर की उपलब्धि मानते हैं। 18 से 25 साल की उम्र के युवा वैज्ञानिक प्रगति को सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं।ड्ढr ड्ढr युवा वर्ग की तीखी निगाहें राजनेताओं की हरकतों पर भी हैं। 26 से 35 वर्ष की आयु के युवा वर्ग की निगाह में आज भारत की सबसे बड़ी विफलता राजनीति और अपराध का गठजोड़ है। 50 वर्ष से ऊपर की आयु वाले गरीबी और असमानता को सबसे बड़ी विफलता मानते हैं। यह सर्वेक्षण उत्तर भारत के जिन 12 शहरों में कराया गया उनके नाम हैं : दिल्ली, लखनऊ, पटना, रांची, देहरादून, चंडीगढ़, आगरा, मेरठ, वाराणसी, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और कानपुर। कानपुर को छोड़कर बाकी शहरों का सर्वे सी फोर ने किया।ड्ढr ड्ढr केवल कानपुर का सर्वे हिन्दुस्तान सम्पादकीय विभाग की टीम ने किया है। पाठको से पूछा गया कि आजाद भारत का सबसे बड़ा सपना वे क्या देखते हैं तब सबसे ज्यादा पाठकों ने कहा हरेक को उच्चस्तरीय शिक्षा पर 18 से 25 वर्ष के नौजवानों के विचार से भारत का मानव-विकास की पायदान पर सबसे ऊपर होना उनका सबसे बड़ा सपना है। इसके बराबर ही वे सबको उच्चस्तरीय शिक्षा को भी रखते हैं। रिसर्च संस्था सी फोर ने हिन्दुस्तान के लिए 11 शहरों में यह सर्वे किया। इसके लिए 1126 व्यक्ितयों सम्पर्क किया गया। इसके अलावा कानपुर शहर में हिन्दुस्तान सम्पादकीय विभाग की टीम ने 20 व्यक्ितयों की राय को दर्ज किया। कानपुर के परिणाम हमने अलग कॉलम में दर्शाए हैं। सर्वे में चार आयु वर्ग के लोगों को लिया गया। इसमें सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता को भी ध्यान में रखा गया। सैम्पल में शामिल व्यक्ियों में 48 प्रतिशत महिलाएं हैं। हमने पहले से तैयार प्रश्नावली पर उत्तर मांगे और हर प्रश्नावली में एक प्रश्न ऐसा भी छोड़ा जिसमें उत्तरदाता कोई दूसरा मामला भी रख सके। सर्वे परिणामों बताते हैं कि भारतीय नागरिक भावुक हुए बगैर विवेकपूर्ण तरीेके से सोचता है।ं

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