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अक्टूबर के पहले निकाय कर्मियों को वेतन दें

नगर विकास एवं आवास मंत्री निकाय कर्मियों के समर्थन में विभागीय अधिकारियों पर बरस पड़े हैं। मई 2007 में लोकल बॉडीज इम्पलाईज फेडरशन के साथ हुए समझौते का अबतक क्रियान्वयन नहीं होने से खिन्न मंत्री ने विभाग की प्रधान सचिव एस जलजा को कड़ा पत्र लिखा है। एक महीने के अन्दर समझौते का क्रियान्वयन करने का निर्देश देते हुए श्री सिंह ने कहा कि अक्तूबर के पहले निकायकर्मियों का वेतन भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए। मंत्री ने यहां तक कहा है कि नगर विकास विभाग कोई प्राइवेट प्रोपर्टी नहीं है कि जब जिसको जो मन करगा, वहीं करगा। वर्तमान शासन काल में ही अगर विभाग के पूर्व सचिव ने समझौते पर हस्ताक्षर किया है तो उसका शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। अगर कर्मियों की मांगों से विभाग सहमत नहीं था तो फिर समझौते पत्र पर हस्ताक्षर क्यों किया गया?ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा है कि नगर निकाय कर्मी राज्य और सरकार के अंग है। उनको विश्वास में लेकर चरणबद्ध रूप से मांगें पूरी की जाए। दरअसल लोकल बॉडीज इम्पलाईज फेडरशन के महामंत्री उमेश्वर ठाकुर के नेतृत्व में छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से मिलकर समझौते की प्रति सौंपते हुए उसके क्रियान्वयन नहीं होने पर असंतोष जताया था। षष्टम वेतन पुनरीक्षण लागू करने एवं तृतीय राज्य वेतन आयोग की अनुशंसाएं शतप्रतिशत लागू करने के साथ ही सरकारी कर्मियों की तरह प्रतिमाह 100 रुपए चिकित्सा भत्ता का भुगतान समझौते के मुख्य बिन्दु हैं। समझौते के मुताबिक पिछली कई हड़तालों की अवधि का वेतन संबन्धित कर्मियों के देय अर्जित अवकाश में समायोजित करना है और अनुकंपा के आधार पर बहाली में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता साक्षर करना है। बावजूद समझौता के सवा साल बीत जाने के बाद भी नगर विकास विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई नहीं करने के कारण मंत्री ने विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त की है।

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