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दिन भर राखी बांध सकती हैं बहनें

यदि भद्रा रात से शुरू होकर दिन तक रहे, तो वह मान्य नहीं होती। ऐसा सर्वोच्च धर्म ग्रंथ निर्णय सिंधु के प्रथम परिच्छेद के भद्रा खंड- पृष्ठ-30 में स्पष्ट लिखा है। इस वर्ष भद्रा 15 अगस्त को रात्रि 1.41 से शुरू होकर 16 अगस्त को दोपहर 1.58 बजे तक है। अत: प्रात: सूर्योदय के बाद वह मान्य नहीं है। अत: 16 अगस्त को सावन पूर्णिमा शनिवार को सुबह से शाम तक निश्चिंत होकर बहनें-भाइयों को और पुरोहित-यजमान को रक्षा बंधन करं। पूर्णिमा तिथि दिन भर और रात्रि 2.17 बजे तक है।गणित ज्योतिष के अनुसार तिथि और भद्रा में स्थानीय समय नहीं देखा जाता, बल्कि घड़ी का समय (स्टैंडर्ड टाइम) देखा जाता है, अत: भद्रा रांची में भी 1.58 बजे तक ही होगा।ग्रहण सामान्य घटना : प्रत्येक वर्ष दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण (कुल चार) पृथ्वी पर कहीं न कहीं होते हैं। ग्रहण एक सामान्य गोचरीय घटना है। इसका कोई अशुभ प्रभाव या फल नहीं होता। शास्त्रों में वर्णित है (निर्णय सिंधु सहित) कि व्रत-पर्व, नियम, उपाकर्म में ग्रहण का वेध या सूतक नहीं लगता। अत: प्रात: काल से ही रक्षाबंधन का मुहूर्त शास्त्र सम्मत है। पं एके पांडेय

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