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भारतीय बीमा क्षेत्र में अपार संभावनाएं

भारतीय बीमा क्षेत्र अगले दो वर्षों के दौरान अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी के साथ 2000 अरब रु. तक पहुंच सकता है। वाणिज्य और उद्योग मंडल एसोचैम के एक अध्ययन के अनुसार 2000 में देश का बीमा क्षेत्र 200 फीसदी बढ़ेगा जिसमें निजी क्षेत्र की कंपनियां अपनी आक्रामक शैली के कारण140 प्रतिशत तक बढें़गीं जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का बाजार हिस्सा 30-40 फीसदी तक रहेगा। एसोचैम का मानना है कि बीमा क्षेत्र का वर्तमान 500 अरब रु. का बाजार अगले दो वर्षों के दौरान चार गुना बढ़ोत्तरी के साथ 2000 अरब रु. तक पहुंच जाएगा। बीमा क्षेत्र में वृद्धि पर एसोचैम ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बीमा क्षेत्र में 175 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और भविष्य में भी इस क्षेत्र में बढ़ोत्तरी की अच्छी संभावनाएं हैं इसलिए जल्दी ही इस क्षेत्र का कारोबार कई गुना बढ़ जाएगा। एसोचैम के अध्यक्ष सज्जन जिंदल का कहना है कि निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों ने बाजार के लिए जो व्यापक और आक्रामक रणनीति अपनाई है उसके कारण सामान्य बीमा तथा जीवन बीमा जैसी कंपनियों का बाजार हिस्सा पिछले चार-पांच साल के दौरान 70 प्रतिशत तक गिर गया है। पहले इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी प्रतिशत तक थी लेकिन आगे बहुत जबर्दस्त प्रतिद्वंद्विता का माहौल है इसलिए इन कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में और गिरावट आ सकती है। जिंदल का कहना है कि निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों को आम लोगों का विश्वास जीतने की कला आती है इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में निजी कंपनियों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ सकती है। ग्रामीण क्षेत्र में अब तक सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों का एकाधिकार था लेकिन अब स्थिति बदली है।

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