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बलात्कार की सजा कम न करें : सुप्रीम कोर्ट

रेप करने वाला महिला की इजत ही नही लूटता बल्कि उसे एक ऐसी मौत विहीन शर्म में डुबो देता है जिससे वह जीवन भर घुट घुटकर मरती है। ऐसे व्यक्ित को काूनन में लिखी अधिकतम सजा देनी चाहिए। यदि ऐसे अपराधी पर रियायत बरती गई तो समाज में उचित संदेश नहीं जाएगा और न्याय प्रणाली से जनता का विश्वास उठ जाएगा। ये टिप्पणियां करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रप के आरोपी गजेंद्र सिंह की सजा कम करने के हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और उसे सात वर्ष के लिए जेल भेज दिया। सर्वोच्च अदालत ने यह फैसला देकर निचली अदालतों को स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं के प्रति अपराधों से सख्ती से निपटें और कानून के अनुसार अधिकतम सजा दें। न्यूनतम सजा उसी स्थिति में दें जब उसके लिए पर्याप्त और विशेष कारण मौजूद हों। जस्टिस अरिाित पसायत और एमके शर्मा ने फैसले में कहा कि इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना कोई पर्याप्त और विशेष कारण दिए दोषी की सजा कम कर दी। जबकि धारा 376 (1) स्पष्ट है कि सजा विशेष व पर्याप्त कारणों पर ही कम की जा सकती है। फैसले में हाईकोर्ट ने सिर्फ इतना ही कहा है कि धारा 376 में उल्लेखित सजा घटाने का प्रावधान इसमें लागू होता है, इसलिए सजा कम की जाती है। निचली अदालत ने गजेंद्र को 10 वर्ष की सजा दी थी।

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