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चार दिन साथ रहे तो बन जाए सिनिकल

या नाम है? अबू बशर। कितना पढ़े हो..आलिम। कम्प्यूटर जानते हो? थोड़ा-थोड़ा। ई-मेल करना आता है..नहीं जनाब। यह बेहद छोटी सी गुफ्तगू थी उस शख्स के साथ जिसके बार में गुजरात पुलिस और यूपी एटीएस का दावा है कि वह इंडियन मुजाहिदीन का थिंक टैंक है। पाँच फुट से कुछ उठती हुई लम्बाई वाले अबू बशर का वजन तो महा चालीस किलो के आसपास होगा पर आवाज में हद दज्रे की बेपरवाही झलक रही थी। उसकी जहनियत के बार में इंट्रोगेशन में लगे एक अफसर का दावा है कि गुजरात दंगों को लेकर वह एकदम जुनूनी है.. कोई चार दिन इसके साथ रह जाए तो इस जसा .सिनिकल. बन जाएगा। अदालत में अबू बशर को पेश करने के दौरान मची भगदड़ में काफी लोग गिर पड़े। एटीएस वालों को चोट भी आ गई। उनकी नजरें बचाकर यह संवाददाता भी बेंच पर बशर के बगल में बैठ गया। उसकी गर्दन तक नीला कपड़ा इस तरह लपेटा हुआ था कि चेहरा नजर न आए। एक अफसर कुछ दस्तावेज लेकर आया और कहा.इस पर दस्तखत करो। उसने उर्दू में अपना नाम लिख दिया। उससे फिर कहा गया..हिन्दी नहीं आती क्या? तब उसने हिन्दी में अपना नाम अबू बशर दर्ज कर दिया। इस संवाददाता ने फिर पूछा कहाँ के रहने वाले हो..उसने कहा सरायमीर ..तब तक एटीएस के एक दरोगा का ध्यान इस तरफ गया। उसने तुरंत अबू बशर की गर्दन पर अपनी हथेलियों का दबाव बढ़ाते हुए कहा..तुमसे कहा था न मेरे दोस्त हो..कुछ बोलना मत..क्यों बोले। अबू बशर अब चुप हो गया। तब तक यह संवाददाता खुद गुजरात पुलिस में क्राइम ब्रांच के एसपी हिमांशु शुक्ल से मुखातिब हुआ और पूछा. यही है इंडियन मुजाहिदीन का चीफ? हिमांशु ने कहा.यह तो आगे के इंट्रोगेशन के बाद पता चलेगा पर इतना तय है कि अहमदाबाद में विस्फोट कराने वाले लोगों के पीछे मास्टरमाइंड यही था। उसका काम था मुस्लिम युवकों को तबाही के लिए मानसिक तौर पर तैयार करना। अबू बशर से पूछताछ करने वाले एक दूसरे अधिकारी ने बताया कि यह बेहद जुनूनी व्यक्ित है। उसमें किसी तरह का खौफ नहीं बल्कि सिर्फ नफरत है।

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