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देश को बदलने में लगे हैं छोटे-छोटे गांधी

वे लोग राजनीति में नहीं है किसी पार्टी में नही है पर देश के असली युवा नेता वे ही हैं और समाज को बदलने का सपना लिए दूरदराज इलाकों में पूरी मेहनत और लगन के साथ रचनात्मक काम कर रहे हैं। इन नेताआें का नाम नहीं काम बोलता है। ये अपने समय के छोटे-छोटे गांधी है। ये ‘यूथ लीडर’ सड़कों पर रेडलाइट पर गुब्बारे बेचनेवाले गरीब असहाय बच्चों को पढ़ाने से लेकर उड़ीसा के कालाहांडी में भुखमरी का समाना कर रहे लोगों के बीच काम करते हैं। चाहे सूचना का अधिकार हो या पर्यावरण का मुद्दा या नाटकों के जरिए सामाजिक परिवर्तन का मसला, ये यूथलीडर हर जगह संघर्ष के मोर्चे पर तत्पर रहते हैं। महाराष्ट्र, केरल, उड़ीसा और दिल्ली के 11 ऐसे ‘यूथ लीडर’ पिछले दिनों एक सप्ताह की कार्यशाला में सम्मानित भी किए गए। नेहरु स्मारक एवं संग्रहालय में आयोजित इस कार्यशाला में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पोती एवं स्मृति दर्शन की उपाध्यक्ष तारा गांधी भट्टाचार्या ने इन युवा नेताआें से संवाद करते हुए कहा कि आज के समाज में यही युवक दरअसल ‘छोटे-छोटे गांधी’ हैं, जो समाज को बदलने में लगे हैं। इस संवाद में अवकाश प्राप्त न्यायाधीश एवं बूकर सम्मान से सम्मानित अंग्रेजी लेखक विक्रम सेठ की मां लीला सेठ, साम्प्रदायिकता के खिलाफ संघर्षरत प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मांडर एवं नेहरु संग्रहालय की निदेशक मृदुला मुखर्जी ने भी इन यूथ लीडरों से सामाजिक बदलाव के बारे में विचार-विमर्श किया। इस कार्यशाला का आयोजन ‘प्रवाह’ नामक गैर सरकारी संगठन ने किया था। प्रवाह की पार्टनरशिप डायरेक्टर कामिनी प्रकाश ने बताया कि देश के सैकड़ों ऐसे ‘यूथ लीडर’ तैयार करने का काम चल रहा है। इन यूथ लीडरों ने अपने बलबूते एक संगठन भी खड़ा कर लिया है, जो समाज को बदलने के काम में लगा है। प्रकाश बताती हैं कि यह कार्यक्रम पिछले तीन साल से चल रहा है। एक साल तक हम इन ‘यूथ लीडरों’ के काम का अवलोकन करते हैं और फिर उन्हें आमंत्रित कर सम्मानित भी करते हैं। कार्यशाला में उनके अनुभवों को सुनते भी हैं और उन्हें भविष्य के लिए सुशिक्षित भी करते हैं। इन यूथ लीडरों की उम्र 17 वर्ष से 27 वर्ष के बीच है। इन यूथ लीडरों ने ‘खोज फाउंडेशन’ ‘अरुणोदयम आह्वान स्टेप्स फार चेंज’ वाईपी फाउंडेशन ‘द्रूथ’ जैसी संस्थाएं खोल रखी हैं। दिल्ली के पवन शर्मा, आनंद मिश्रा, इषिता चौधरी, उड़ीसा के विश्वजीत दास, विदर्भ के संतोष जादव, केरल के डी धनुराज, महाराष्ट्र के परिणति शिंदे, उड़ीसा के प्रशांत मिश्रा ऐसे ही यूथ लीडर हैं, जिन्हें देश के युवा सांसदों की तरह मीडिया में पहचान भले ही न मिली हो, पर अपने इलाके के वे असली युवा नेता हैं। लोग उनके काम को पहचानते हैं। उनका नाम नहीं काम बोलता है। इस बार हमने कार्यशाला के लिए तेरह ऐसे संगठनों का चयन किया था जिसके 22 यूथ लीडरों को हमने आमंत्रित किया था। ये यूथ लीडर एक साल तक अपने काम से अवगत कराएंगे और उसके बाद हम उनका चुनाव करेंगे और श्रेष्ठ. ‘यूथ लीडर’ को अगले वर्ष सम्मानित करेंगे।

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