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सीटीटी से वायदा कारोबार गिरेगा: सीआईआई

अंतरराष्ट्रीय बाजार में विभिन्न जिंसों के आसमान छूते मूल्यों के चलते पिछले कई महीने से घरलू जिंस बाजार भी मंहगाई के ग्राफ को प्रभावित कर रहा है। इस बीच देश के कमोडिटी एक्सचेंजों से जुड़ी ट्रेडिंग लॉबी ने सरकार की ओर से प्रस्तावित कमोडिटी ट्रांजक्शन टैक्स (सीटीटी) के खिलाफ माहौल बनाना शुरू कर दिया है। इस सिलसिले में प्रमुख उद्योग चैंबर सीआईआई ने अध्ययन के जरिए यह बात सामने रखी है कि इस टैक्स के लागू होने से देश के तीन राष्ट्रीय और 1क्षेत्रीय कमोडिटी एक्सचेंजों के तहत प्रमुख जिंसों के वायदा कारोबार में 18 से 5ीसदी तक की कमी आ सकती है। लिहाजा, सरकार को इसके कार्यान्वयन पर पुनर्विचार करना चाहिये। सीआईआई के मुताबिक कमोडिटी एक्सचेंजों के जरिए वायदा कारोबार को जिंस बाजार में चल रही भारी अस्थिरता के जोखिम को कम करने के लिए एक बीमा उत्पाद के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसा कर लागू करने से जोखिम को कम करने यह महत्वपूर्ण जरिया कमजोर होगा। परिणामस्वरूप कारोबार में गिरावट आना तय है। वित्त वर्ष 2008-0े केंद्रीय बजट में सीटीटी लागू करने का प्रस्ताव है। इसकी दर एक लाख रुपये के जिंस कारोबार पर 17 रुपये का कराधान है। मौजूदा समय में संबंधित ट्रेडर्स पर ट्रांजक्शन की लागत लगभग औसतन दो रुपये प्रति लाख है। ऐसे में सीटीटी लागू होने से उनकी लागत आठ गुना बढ़ेगी। दुनिया में कहीं भी कमोडिटी ट्रेडिंग पर ऐसा कर लागू नहीं है। ऐसे में घरेलू वायदा बाजार अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता खो देगा। यही नहीं, इससे वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी। भारत एशियाई बाजार में जिंसों के मूल्यों का निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका अदा कर रहा है। यह भारत की इस क्षमता को गहर तक प्रभावित कर देगा। चैंबर के मुताबिक अगर इसे कर को लागू किया जाता है तो सात दिनों के भीतर सोने के वायदा कारोबार में 5ीसदी की गिरावट आएगी।

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