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विभागीय काम हो, तो चकचका देंगे सड़क

सड़कों की दुर्दशा सुधर जायेगी बशर्ते विभागीय काम का आदेश मिल जाये। चिप्पी साटो काम में पथ निर्माण के इंजीनियरों ने नया फंडा रखा है। चीफ इंजीनियर ने विभाग के पास एक प्रस्ताव भेजा है। नन प्लान में विभागीय काम का आदेश चाहते हैं। यह काम कैसे हो इंजीनियर इन चीफ इसे देख रहे हैं। सरकार सड़कों की दुर्दशा पर नाराज है और विभाग परशान। मरम्मत तथा कालीकरण का काम लटका है। नन प्लान में 102 करोड़ के विरुद्ध अभी तक महा 12 करोड़ खर्चे हैं। जबकि 60 करोड़ का आवंटन दिया जा चुका है।ड्ढr वैसे मार्च तक नन प्लान के पैसे उड़न छू हो जायेंगे इसकी पूरी संभावना है। ऐसा होता भी रहा है। यही चिप्पी साटो का कमाल है। अब काम में बिटुमिन का बढ़ा रट मिलेगा इसका फैसला ले लिया गया है। इस अड़चन का दूर होना जरूरी था। नये सचिव केके खंडेलवाल ने सड़कों पर काम के लिए टाइम फ्रेम के साथ जब हार्ड टास्क दिये, तो इंजीनियरों ने विभागीय काम का विकल्प रखा। चीफ इंजीनियर विजय कुमार का कहना है कि बिटुमिन के रट बढ़ने और टेंडरों के लटकने से काम पर असर पड़ा है। विभागीय काम का आदेश मिल जाये, तो निश्चित तौर पर काम दिखेगा। गड्ढे भराना बेहद जरूरी है। समीक्षा में भी इंजीनियरों (इइ) ने कम से कम दस लाख तक का काम विभागीय स्तर कराने पर जोर दिया है।ड्ढr फंड रहते काम नहीं होने पर इंजीनियर इन चीफ कहते हैं: जल्दी ही रास्ता निकल जायेगा। विभागीय काम के लिए आदेश लेने का प्रयास कर रहे हैं।ड्ढr गौरतलब है कि पीडब्ल्यूडी में विभागीय काम कराने का आदेश नहीं है। टेंडर छोड़ विभागीय काम कराने के कारण कई आला इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही चल रही है।ड्ढr यह भी तय है कि विभागीय काम भी इंजीनियर परोक्ष तौर पर ठेकेदार से ही करायेंगे। अब किन शर्तो पर और कितनी राशि तक की योजना पर काम कराने का आदेश दिया जायेगा यह देखना महत्वपूर्ण है।ं

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