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अगर-मगर के बीच फंसे हैं कांग्रेस के विधायक

झारखंड की राजनीति, कांग्रेस के विधायक और झामुमो सुप्रीमो अगर-मगर के बीच फंस गये हैं। कांग्रेस आलाकमान ने स्पष्ट कहा है कि अगर शिबू सोरन सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं, तो कांग्रेस उन्हें समर्थन देगी, मगर निर्दलीय विधायकों का समर्थन उन्हें खुद जुटाना होगा। कांग्रेस ने शिबू की पीठ थपथपा दी है, लेकिन पीठ पर खड़ी नजर नहीं आ रही। यही कारण है कि केंद्र में यूपीए गठबंधन के सबसे कद्दावर नेता लालू प्रसाद भी शिबू के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। कभी वह कोड़ा सरकार का भविष्य उजवल बताते हैं, तो कभी राष्ट्रपति शासन की संभावना जताते हैं। लालू प्रसाद भी अगर-मगर में शिबू के समर्थन की बात करते हैं।ड्ढr यही कारण है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बलमुचू ने चुप्पी साध ली है। राज्य राजनीतिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष छिपते फिर रहे हैं। अलबत्ता विधायक थॉमस हांसदा खुलकर कहते हैं कि वह किसी भी हाल में शिबू सोरन का समर्थन नहीं करंगे। कांग्रेस के अन्य विधायक भी उलझन में हैं। अंतरात्मा की आवाज और आलाकमान के निर्देश के बीच वे झूल रहे हैं। पार्टी के नौ में से छह विधायक कहते हैं अभी नेतृत्व परिवर्तन का कोई औचित्य नहीं है। उनके अनुसार मधु कोड़ा के नेतृत्व में विकास कार्य नहीं हो रहा है और भ्रष्टाचार भी बढ़ा है, लेकिन जिस विकल्प की चर्चा हो रही है, उसमें दोनों समस्याएं और बढ़ेंगी।ड्ढr कांग्रेस के अल्टीमेटम के बाद कोड़ा ने विकास की रफ्तार तेज की है। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन का राज्य पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। व्यक्ितगत राय पूछने पर विधायक कहते हैं कि उनकी चले, तो कोड़ा के पक्ष में जायेंगे। साथ ही यह भी कहते हैं कि कांग्रेस अनुशासित पार्टी है, जहां आलाकमान का निर्णय सवरेपरि होता है। आलाकमान जिसे समर्थन देने का फरमान जारी करगी, यहां के विधायक उसी के साथ रहेंगे।

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