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अखिल को देंगे ओलंपिक पदक का तोहफा बेटे

अखिल की क्वार्टर फाइनल में हार से बीजिंग में भारतीय बॉक्िसंग खेमे में निराशा जरूर होगी लेकिन यहां भारत में जितेन्दर और विजेन्दर के पिता को आशा है कि जो काम अखिल नहीं कर सका उसे उनके बेटे करेंगे। इतना ही नहीं वे देश के साथ-साथ अखिल को भी ओलंपिक पदक का तोहफा दे उनकी निराशा को खुशी में बदल देंगे। विजेन्दर के पिता महीपाल सिंह कहते हैं, ‘मुझे तीनों ही लड़कों से पदक की उम्मीद थी। इन सभी ने बहुत मेहनत की है। कल भाग्य अखिल के साथ नहीं था। खेलों में जीत-हार तो लगी रहती है। अखिल को भी निराश नहीं होना चाहिए।’ हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर विजेन्दर के पिता को अपने बेटे से पदक की पूरी उम्मीद है। विजेन्दर कहते हैं, ‘पिछले 8 साल से हम अपने बेटे से ढंग से मिल नहीं पाए हैं। ज्यादातर समय वह बाहर ही रहता है। कभी कोई चैंपियनशिप तो कभी कोई कैम्प। ज्यादातर समय फोन पर ही बात होती है। आज भी फोन पर ही बात हुई। अखिल के हारने से थोड़ा निराश जरूर था। लेकिन विश्वास कायम था। कह रहा था, पापा चिंता न करो। पदक लेकर ही आऊंगा।’ विजेन्दर कहते हैं, ‘हम तो गाय-भैंस चराने वाले आदमी हैं। मैं ड्राइवरी करता हूं। विजेन्दर की मम्मी आज भी गाय-भैंस चराने जाती हैं। आज टी.वी. और मीडिया के कैमर हमार घर के दरवाजों पर खड़े हैं। हमने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि हमारी शक्लें भी टी.वी. में नजर आएगी। हमें अपने बेटे पर गर्व है। इन बच्चों ने बॉक्िसंग को पहचान दिलाई है। आज देश में हर कोई बॉक्िसंग की बात कर रहा है। हमार लिए इससे बड़ी खुशी की बात और क्या होगी।’ जितेन्दर के पिता सज्जन कुमार तो अखिल के हारने का गम अभी तक भुला नहीं पाए हैं। कहते हैं, ‘मुझे तो अपने बेटे से भी ज्यादा उम्मीद अखिल से थी। मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि अखिल हार गया। मेर बेटे को बॉक्िसंग का पाठ अखिल ने ही पढ़ाया है। अब वह ही अखिल को ओलंपिक पदक का तोहफा देगा।’ क्या आपको नहीं लगता कि अखिल की हार का दबाव जितेन्दर के प्रदर्शन पर भी पड़ेगा, पूछने पर कहते हैं, ‘हां, पहले तो चिंता हो रही थी। रात को और सुबह अखिल और जितेन्दर दोनों से बात हुई। अब सबकुछ सामान्य है। जितेन्दर भी अपनी कल के मुकाबले की तैयारियों में लगा है। उम्मीद है विजेन्दर और जितेन्दर दोनों पदक जीतेंगे।’ जितेन्दर का मुकाबला दो बार के यूरोपीय चैंपियन से है, क्या इसका दबाव भी रहेगा, कहते हैं, ‘रिंग में पहले भी दोनों एक-दूसर के सामने हो चुके हैं। हां, पिछली बार जीतू (प्यार से जितेन्दर को जीतू कहते हैं) एक अंक से हार गया था। इस बार वह कोई मौका नहीं चूकेगा। हम तो दुआ कर ही रहे हैं देशवासियों से भी उम्मीद करते हैं कि वे भी इनके लिए दुआ मांगे।’ जितेन्दर के परिवार में किसी के पास रोगार नहीं है। पूरा परिवार उन पर ही आश्रित है।

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