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गुरुचाी से कांग्रेस का कोई वादा नहीं था

तो क्या वाकई कांग्रेस और यूपीए के राजनीतिक प्रबंधकों ने प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के विश्वासमत प्रस्ताव के समर्थन के लिए झारखंड मुक्ित मोर्चा और गुरुाी के नाम से मशहूर इसके अध्यक्ष शिबू सोरन के साथ केंद्र में कोयला मंत्री अथवा झारखंड का मुख्यमंत्री बनाने के संबंध में किसी तरह का ‘कमिटमेंट’ नहीं किया था। यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले चुके शिबू सोरन को मुख्यमंत्री बनाने के लिए बहुमत विधायकों का समर्थन जुटाने का तकनीकी फच्चर फंसा कर एक तरह से कांग्रेस ने गुरुाी को मंझधार में छोड़ दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि अगर गुरुाी जरूरी विधायकों का समर्थन जुटा लेते हैं तों पार्टी के विधायक उन्हें समर्थन देंगे। लेकिन कुछ समय पहले कोड़ा को हटाने के लिए अल्टीमेटम तक जारी कर चुकी कांग्रेस इस समय कोड़ा को त्यागपत्र देने का निर्देश देने से कतरा रही है। कांग्रेस और राजद के परोक्ष समर्थन के कारण ही कोड़ा और उनके डिप्टी स्टीफन मरांडी तने हुए हैं। दरअसल, कांग्रेस कोड़ा से पिंड तो छुड़ाना चाहती है पर इसका ठीकरा अपने नहीं सोरन के माथे फोड़ना चाहती है। कांग्रेस के नेता अनौपचारिक बातचीत में राष्ट्रपति शासन के तहत विस के नए चुनाव की वकालत करते हैं। राष्ट्रपति शासन अपरिहार्य होते देख यूपीए समर्थक तथा कुछ निर्दलीयों के भी शिबू के साथ जुड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इन दिनों एक बड़ा ‘खुलासा’ कर रहे हैं कि विश्वासमत के लिए झामुमो का समर्थन हासिल करने के लिए उनसे ेकोई ‘कमिटमेंट’ नहीं किया गया। सबने राष्ट्र हित में ही सरकार का समर्थन किया था। हालांकि झामुमो के समर्थन की घोषणा की बात सामने आने के साथ ही उन्हें केंद्र में कोयला मंत्री और उनके एक सहयोगी को राज्य मंत्री बनाए जाने की बातें सामने आई थीं। लेकिन मंत्रिमंडल के विस्तार की हाल फिलहाल कोई संभावना नजर नहीं आते देख श्री सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री की कुरसी पर दावा ठोंक दिया।

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