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मकान पर जबरन कब्जा किए थे उपेंद्र

भवन निर्माण विभाग ने साफ कहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र प्रसाद सिंह (उपेंद्र कुशवाहा) का तीन साल से अधिक सरकारी मकान पर अवैध कब्जा था। नियम के अनुसार ही उनसे मकान खाली कराया गया है। मकान खाली करने के लिए उन्हें विभाग की ओर से पहली नोटिस 11 मई 2005 को ही दी गई थी। विभाग ने मंगलवार को कुशवाहा के मकान प्रकरण का पूरा ब्योरा दिया। उसी साल 27 मई को दूसरी नोटिस दी गई। इसके बाद विधानसभा से 11 जून 05 को एक पत्र पटना के डीएम को लिखा गया। इसमें जिला प्रशासन से आग्रह किया गया था कि वह श्री सिंह के कब्जे से इस मकान को जबरन मुक्त कराए।ड्ढr ड्ढr पत्र के अलावा भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों ने व्यक्ितगत तौर पर भी श्री सिंह से मकान खाली करने का आग्रह किया। वह हमेशा यही कहते रहे कि मकान खाली नहीं करंगे। इसी बीच सरकारी मकानों पर अवैध कब्जे का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कब्जावाले सभी सरकारी मकानों को खाली कराने का आदेश दिया। विभाग के अनुसार इस साल 16 मई को जिला नियंत्रण कक्ष ने एक मजिस्ट्रेट को मकानी खाली कराने के लिए तैनात किया। उस दिन उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी ने कहा कि वह अकेले घर में हैं। पति के लौटने के बाद मकान के बार में बातचीत होगी। 26 मई को जब सरकारी टीम पहुंची तो राकांपा के कार्यकर्ता लड़ाई के मूड में आ गए थे। अंत में 17 अक्तूबर को यह मकान श्री सिंह के कब्जे से मुक्त हो पाया। विभाग ने यह भी कहा है कि पूर्व विधायकों को किराये पर सरकारी मकान देने का कोई प्रावधान नहीं है। मालूम हो कि श्री कुशवाहा यही कह रहे हैं कि उन्होंने बाजार दर पर मकान देने के लिए भवन निर्माण विभाग में अर्जी दे रखी है।

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