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बैंकों की देशव्यापी हड़ताल आज

सरकारी क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण, बैंकों में सार्वजनिक पूंजी कम करने का प्रयास और सार्वजनिक बैंकों के विलय के खिलाफ बुधवार को राज्य समेत पूर देश में बैंकों की हड़ताल रहेगी। हड़ताल की पूर्व संध्या पर भारतीय रिार्व बैंक के मुख्य द्वार पर आयोजित बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की एक रैली को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाक्ष एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पी डी सिंह ने कहा कि केन्द्र की गलत नीतियों के कारण आम जनता महंगाई की चक्की में पीस रही है।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों ने केन्द्र सरकार को कराड़ों का मुनाफा दिया लेकिन इसे प्रोत्साहित करने के बजाए सरकार इनको बंद करने और विलय का प्रयास कर रही है। रैली को आर पी मिश्रा, रामेश्वर प्रसाद, रामलला सिंह, बी के मिश्रा, अरुण कुमार, सुरन्द्र राय, के पी सिंह, परमहंस सिंह और डा. अरविन्द ने भी संबोधित किया। बिहार प्रोविन्सियल बैंक इम्प्लाक्ष एसो. के प्रवक्ता संजय तिवारी ने कहा कि 20 अगस्त को पूर देश में बैंकों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल रहेगी। इस दौरान एटीएम सेवा भी ठप रहेगी। उन्होंने बताया कि इस हड़ताल को एआईबीओए और बेफी भी शामिल होंगे। दूसरी ओर बिहार अनुसचिवीय कर्मचारी संघ की पटना शाखा ने भी इस हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। संघ के जिला मंत्री चंद्रिका पासवान विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ एवं बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर जिला मुख्यालय, सभी अनुमंडल एवं सभी प्रखंड कार्यालयों के सभी कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। ग्रामीण चिकित्सा भत्ते में भेदभावड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) ने कहा है कि राज्य सरकार ग्रामीण चिकित्सा भत्ता देने में भेदभाव कर रही है। भासा के राज्य प्रवक्ता डा. रणजीत कुमार ने कहा है कि राज्य सरकार मुस्कान कार्यक्रम को सफल बता रही है जबकि उस कार्यक्रम को सफल बनाने वाले चिकित्सकों की असफल करार दे रही है। सरकार का यह तर्क डाक्टरों की समझ के पर है। उन्होंने कहा कि टीकाकरण और परिवार कल्याण कार्यक्रम की 0 फीसदी उपलब्धि प्राप्त करने का सरकार का लक्ष्य अव्यावहारिक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में टीके की आपूर्ति अनियमित रहती है। पिछले डेढ़ महीने से डीपीटी की आपूर्ति बाधित है। प्रदेश में एनेस्थेटिस्ट की काफी कमी है। वर्ष के कई महीनों में मौसम अनुकूल नहीं रहने के कारण बन्ध्याकरण एवं नसबन्दी का कार्य प्रभावित रहता है। बावजूद इन सब कमियों को दरकिनार करते हुए सरकार द्वारा सारा दोष चिकित्सकों पर मढ़ दिया जाता है। सूचीबद्ध निजी क्लीनिकों द्वारा नि:शुल्क बन्ध्याकरण ऑपरशन करने के बाद भी उससे संबंधित राशि के भुगतान में बाधा खड़ी की जा रही है। ऐसी स्थिति में भासा ने ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सभी चिकित्सकों को बिना शत्र्त एवं अविलम्ब ग्रामीण चिकित्सा भत्ता देने की मांग की है।ड्ढr ड्ढr सरकार पर आरोप लगायाड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। एस 4 ने कहा है कि अगर भूमि सुधार आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो राज्य में अव्यवस्था फैल जाएगी। मीडिया प्रभारी कुंदन सिंह ने कहा कि आयोग ने भूमिहीन परिवारों को एक-एक एकड़ जमीन देने की सिफारिश की है। सच यह है कि सरकार के पास इतनी जमीन नहीं है।

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