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सिमी के खिलाफ केंद्रने दिए सबूत

गुजरात में मिले पुख्ता सबूतों से उत्साहित केंद्र सरकार सिमी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नए दस्तावेज दाखिल किए हैं। केंद्र ने कहा है कि देशभर में हाल ही में हुए विस्फोटों में सिमी की लिप्तता पाई गई है जो उसे गैरकानूनी संगठन साबित करने के लिए पर्याप्त है। अतिरिक्त सालिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम ने बुधवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीएन अग्रवाल से अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने की अनुमति मांगी थी। 5 अगस्त को सबूतों के अभाव में दिल्ली हाईकोर्ट ट्राईब्यूनल ने सिमी के खिलाफ लगा प्रतिबंध हटा दिया था। हालांकि अगले ही दिन केंद्र सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से रोक का आदेश हासिल कर लिया। लेकिन केंद्र के सामने बड़ी चुनौती यही है कि जो सबूत हाईकोर्ट में विफल हो चुके हैं उन्हें सुप्रीम कोर्ट में कैसे जीवित किया जाए। अब गुजरात में मिले पुख्ता सबूतों से उसका हौसला बढ़ा है। 30 पेज के नए शपथपत्र में केंद्र सरकार ने बताया है कि 26 जुलाई 08 को अहमदाबाद में हुए विस्फोटों पर सिमी के खिलाफ 16 अगस्त को केस दर्ज किए गए हैं। इससे पूर्व इसके सदस्य 2001 में सूरत में गैरकानून गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं। हालांकि यह जानकारी गुजरात पुलिस ने गत सप्ताह ही दी है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि संगठन देश के सामाजिक ताने बाने को तहत नहस करने पर तुला हुआ है और मुसलमानों को दंगों के लिए भड़का रहा है। इसलिए संगठन पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है। केंद्र ने कहा है कि ट्राइब्यूनल जज ने केस की मेरिट पर विचार नहीं किया है सिर्फ तकनीकी आधार पर प्रतिबंध हटाने का फैसला दिया है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। मामले की सुनवाई सोमवार 25 अगस्त को होनी है।

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