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टैक्स चोरों की शामत

बजट अनुमानों से कहीं अधिक खर्च के बोझ तले दबा वित्त मंत्रालय भले ही प्रत्यक्ष कर संग्रह में हुई भारी बढ़ोत्तरी से फिलहाल खुश नजर आ रहा हो लेकिन चालू वित्त वर्ष के दौरान उस पर राजकोषीय घाटे को काबू करने की बड़ी चुनौती सामने है। लिहाजा, राजस्व विभाग कर चोरों के खिलाफ अभियान संचालित करने के मूड में है। इस बात का संकेत राजस्व सचिव भिड़े ने दिया है। पिछले कुछ माह से सामने आ रहे औद्योगिक वृद्धि के आंकड़े बेहद निराशाजनक रहे हैं लेकिन अप्रैल से जुलाई माह के दौरान प्रत्यक्ष कर संग्रह में हुई 46 फीसदी की बढ़ोत्तरी के चलते वित्त मंत्रालय ने माना है कि अर्थव्यवस्था की सेहत बेहद अच्छी है। इसके बावजूद राजकोषीय घाटे पर संकट बना हुआ है। इसके चलते राजस्व विभाग सरकारी खजाना बढ़ाने के तौर-तरीकों पर विचार करने में जुट गया है। उद्योग चैंबर फिक्की की एक बैठक को संबोधित करते हुये राजस्व सचिव पी.वी.भिडे ने कहा कि सरकार कर चोरों के खिलाफ अभियान शुरू कर सकती है और साथ ही कई प्रकार की कर रियायतों को भी हटा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी राजकोषीय घाटे और महंगाई से निपटना है। इसलिए ही इस दिशा में विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर-ाीडीपी (सकल घरलू उत्पाद) अनुपात में प्रत्यक्ष कर संग्रह की हिस्सेदारी बढ़ाना अनिवार्य है। इसके लिए यह सब करना होगा। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि भारत में कॉरपोरट कर बहुत ज्यादा है। उनके मुताबिक कॉरपोरट कर की घोषित दर 33.ीसदी भले हो लेकिन रियायतों के जरिए कॉरपोरट जगत को मिलने वाली छूट को घटा दिया जाये तो प्रभावी दर सिर्फ 20 फीसदी ही रह जाती है। दूसरी ओर वित्त मंत्रालय ने अपने एक बयान में माना है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान अप्रैल से जुलाई माह के दौरान प्रत्यक्ष कर संग्रह 46.ीसदी बढ़कर 71,648 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

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