DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

माओवादियों ने अब बैंकों पर साधा निशाना

रडकोरिडोर बनाने के लिए माओवादियों को हथियार के साथ ‘कैश’भी चाहिए। लिहाजा पुलिस पिकेट और शस्त्रागारों को लूटने के पुराने ट्रंड से एक कदम और आगे बढ़कर माओवादियों ने अब बैंकों पर निशाना साधा है। मोतिहारी के मधुबन, वैशाली के जनदाहा और गुरुवार को गया के इमामगंज में बैंक पर हमला इसकी पुष्टि करता है। सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार को खुफिया तंत्र से लगातार ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं कि माओवादी बैंकों में जमा रकम पर निगाह गड़ाए बैठे हैं। इसकी दूसरी वजह यह भी मानी जा रही है कि पिछले कुछ महीनों में पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ अपनी रणनीति में बदलाव किए हैं। माओवादियों के ओहदेदार नेताओं को अपनी गिरफ्त में लेना ही पुलिस की पहली प्राथमिकता है। हाल के दिनों में कई हार्डकोर नेता पकड़े भी गए।ड्ढr ड्ढr बताया जाता है कि बड़े नेताओं के जेल में रहने से क्षेत्रों में उनका दबदबा घटा है और ‘लेवी’ और ‘फंडिंग’ के स्रेत भी घटे हैं। माओवादियों के लिए आर्थिक मोर्चे पर यह बड़ा झटका रहा है। हथियार, ट्रनिंग और दूसर उपकरणों के लिए उन्हें पैसे चाहिए। सूत्र बताते हैं कि बैंक माओवादियों के लिए अब आसान टार्गेट हैं। इसी क्रम में वैशाली जिले के जनदाहा में बैंक पर माओवादियों का हमला हुआ था। पीएलजीए के गुरिल्ला लड़ाकों की मदद से माओवादियों ने इसे ‘ऑपरशन जनदाहा’का नाम दिया था। वहीं मधुबन में हुए हमले को ‘ऑपरशन धमाका’का नाम दिया गया। माओवादियों ने अपने एक मुखपत्र में भी इसका खुलासा किया है कि जहानाबाद जेल ब्रक के बाद संगठन की आर्थिक समस्या को हल करने की कड़ी में ही ‘ऑपरशन जनदाहा’ को अंजाम दिया गया। संभवत: इमामगंज में भी उनकी यही योजना थी। एडीजी (मुख्यालय) अनिल सिन्हा ने भी इमामगंज हमले के बाद यही कहा कि जवानों ने अपनी जान देकर बैंक को लुटने से बचा लिया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: माओवादियों ने अब बैंकों पर साधा निशाना