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नायपाल लें भारत की नागरिकता

दशकों पहले भारत से सात समंदर पार जाकर बस गए भारतीय मूल के लोग अब भारत की नागरिकता हाासिल कर रहे हैं। पिछले तीन साल से भी कम समय के दौरान करीब तीन लाख भारतवंशियों ने फिर से अपने वतन की नागरिता हासिल कर ली। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में बस गए भारतवंशी सर्वाधिक हैं। अकेले अमेरिका से करीब सवा लाख भारतवंशियों ने भारत की नागरिकता ली है। एक बात गौर करने लायक है कि फीाी, मारीशस, युगांडा, त्रिनिडाड, मलेशिया जसे देशों में बसे भारतवंशियों ने नागरिकता लेने में कोई खास उत्साह नहीं दिखाया। इन सभी में भारतीय मूल के लोग बहुत लम्बे अरसे से बसे हुए हैं। इसको लेकर कुछ हैरानी भी जाहिर की जा रही है क्योंकि इनमें से कुछेक देशों में भारतीयों को प्रताड़ित करने की भी खबरें आ रही थीं । नागरिकता मिलने का मतलब यह हुआ कि इन्हें भारत का जीवनभर का वीजा मिल जाता है। इसके अतिक्ित इन्हें और इनके बच्चों के लिए भारत की शिक्षण संस्थानों में उच्च शिक्षा हासिल करने का रास्ता भी आसान हो जाता है। इनके लिए कुछ सीटें आरक्षित कर दी जाती हैं। लेकिन इन्हें पंचायत, विधान सभा या लोकसभा चुनावों के दौरान अपने मताधिकार का मौका नहीं मिलेगा। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि नागरिकता देने का यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए भारतवंशी भारत में फिर से आकर बसना चाह रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रवासी भारतीय मामलों का मंत्रालय कोशिश कर रहा है कि कुछ प्रमुख भारतवंशी भी नागरिकता हासिल कर लें। इनमें नोबल पुरस्कार विजेता लेखक वीएस नायपाल, वेस्ट इंडीा क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एल्विन कालीचरण, ब्रिटेन की प्रमुख कंपनी कोबरा बीयर के अध्यक्ष करण बिलमोरिया आदि शामिल हैं। ध्यान रहे कि साल 2005 में मुम्बई में हुए प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने घोषणा की थी कि सरकार दुनिया के किसी भी देश में बसे भारतवंशियों को यहां की नागरिकता देगी। इनमें पाकिस्तान और बंगलादेश के नागरिक शामिल नहीं हैं।

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