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एनएसजी देशों की पूर्व शर्त मंजूर नहीं : भारत

एक ओर जहां विदेश सचिव शिवशंकर मेनन भारत-अमेरिका एटमी करार की राह में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) द्वारा खड़े किए गए नए अवरोधों के सिलसिले में विचार-विमर्श करने वाशिंगटन रवाना हो रहे हैं, वहीं भारत ने यह साफ कर दिया है कि एनएसजी की मंजूरी पाने के वास्ते उसे कोई पूर्व निर्धारित शर्त कबूल नहीं है। विएना में एनएसजी देशों की शुक्रवार को संपन्न दो दिन की बैठक में कुछ सदस्य देशों ने परमाणु ईंधन सप्लाई के लिए भारत को विशेष छूट देने से पहले भारत-अमेरिकी एटमी करार के मसौदे में संशोधन की मांग उठाई। पैंतालीस सदस्यों वाले एनएसजी के सदस्य देश न्यूजीलैंड, आस्ट्रिया, नार्वे, आयरलैंड और स्विटजरलैंड दबाव डाल रहे हैं कि मूल मसौदे में संशोधन किया जाए। इसके जरिए वे भारत पर एनपीटी और सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करने का दबाव डालना चाहते हैं। एनएसजी सदस्य देशों की आगामी बैठक सितम्बर के पहले सप्ताह में होगी। इस बीच विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने साफ किया है कि भारत किसी भी पूर्व शर्त को स्वीकार नहीं करगा। उन्होंने शनिवार को कोलकाता जाते हुए विमान में साथ चल रहे पत्रकारों से कहा कि हम परमाणु समझौते के मूल मसौदे में एनएसजी के संशोधनों को देखने के बाद ही अपनी राय बनाएंगे। उधर, विदेश सचिव मेनन सोमवार को एक दिन की यात्रा पर वाशिंगटन पहुंच रहे हैं जहां वह अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी विलियम बर्न्‍स से बातचीत करंेगे।

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