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और पावरफुल हो गए मुखिया जी

मुखियाजी और पावरफुल हो गए हैं। अधिकारों को लेकर अफसरों से गुत्थमगुत्था होने के क्रम में उन्होंने एक और लड़ाई जीत ली है। उनके द्वारा की जा रही लगातार मांग को मानते हुए राज्य सरकार ने तय किया है कि अब मुखिया-सरपंचों के कार्यालय की व्यवस्था की जिम्मेवारी उपविकास आयुक्तों (डीडीसी) के पास नहीं रहेगी। यह जिम्मेवारी खुद मुखिया और सरपंच के बदले न्यायमित्र उठायेंगे।ड्ढr ड्ढr इसके पहले चरण में राज्य सरकार ने सभी डीडीसी को कहा है कि मुखिया और सरपंचों को कार्यालय के लिए फर्नीचर खरीद की राशि दे दी जाए। वे अपने कार्यालय के लिए खुद अपनी पसंद के फर्नीचर की खरीद करंगे। पहले यह जिम्मेवारी डीडीसी की होती थी। मुखिया बराबर कहते रहते थे कि कार्यालय उनका और खर्च कोई और कर, यह नहीं चलेगा। अब उनकी मांग मान ली गई है। पंचायती राज मंत्री हरि प्रसाद साह ने बताया कि मुखिया और सरपंचों को अधिकारसंपन्न बनाने की कार्रवाई लगातार जारी है।ड्ढr ड्ढr सरपंचों को कानूनी रूप से जागरूक बनाने के लिए हाई कोर्ट की ओर से प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है। कानून के विशेषज्ञ उन्हें जानकारी देंगे। इससे उन्हें पता चलेगा कि कैसे मामलों की सुनवाई उन्हें करनी है। उन्होंने बताया कि पंचायत सरकार भवन बनाने के लिए विश्व बैंक से र्का लेने की बात चल रही है। उन्होंने विभाग के प्रधान सचिव से कहा है वे ग्राम्य अभियंत्रण विभाग से संपर्क करके पता करं कि भवन के निर्माण में कितनी राशि लगेगी। पंचायत सरकार भवन को गांव की विधानसभा के तर्ज पर ही बनाया जाएगा।

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