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तमिल मुद्दे पर राजनयिक व राजनीति दोनों कांपे

उधर श्रीलंका में लिट्टे प्रमुख वी. प्रभाकरण को मारने के लिए घेराबंदी की खबरें हैं और इधर इस घटनाचक्र से आम चुनावों के मौके पर तमिलनाडु़ की राजनीति में भारी उथल-पुथल के हालात पैदा हो गए हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से बने दबाव के बाद द्रमुक सुप्रीमो करुणानिधि सोमवार को अपने उस बयान से पलट गए जिसमें उन्होंने राजीव गांधी की हत्या के प्रमुख अभियुक्त प्रभाकरण को अपना मित्र बताया था लेकिन मामला इससे ठंडा पड़ने के बजाय और उलझ गया है। करुणानिधि के ‘दूत’ दयानिधि मारन ने सोनिया से संपर्क कर बीच-बचाव का प्रयास जरूर किया है लेकिन कांग्रेस का अंदरूनी संकट बढ़ता जा रहा है। पार्टी सार्वजनिक तौर पर इस प्रकरण पर बेहद संभल कर मुहं खोल रही है। द्रमुक की मुश्किल यह है कि प्रतिद्वंद्वी जयललिता की रणनीति द्रमुक-कांग्रेस गठाोड़ पर भारी पड़ रही है। अन्नाद्रमुक ने अपने घोषणापत्र में लिट्टे की तमिल ईलम की मांग का समर्थन किया है। इधर, भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने स्वीकार किया कि कूटनीतिक मोर्चे पर करुणानिधि के बयान ने भारत के लिए मुश्किल पैदा कर दी है। सूत्रों हालांकि करुणानिधि के स्पष्टीकरण का स्वागत किया है लेकिन साथ ही चिंता भी प्रकट की है कि आम चुनावों के चलते इस संवेदनशील मसले पर भारत के लिए श्रीलंका के साथ दो-टूक बात करने माहौल नहीं है। श्रीलंका में तमिलों के खिलाफ की जा रही सैनिक कार्रवाई से तमिलनाडु के राजनीतिक हालात ‘विस्फोटक’ होते जा रहे हैं और जानकार लोग इस संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं कि श्रीलंका सेना ने यदि लिट्टे प्रमुख का सिर कलम करने का अपनी जिद नहीं छोड़ी तो डीएमके-कांग्रेस गठाोड़ खतर में पड़ सकता है। तमिलनाडु कांग्रेस ने भी करुणानिधि के बयान को यह कहकर बड़ा मुद्दा बना दिया है कि जब लिट्टे के पक्ष में बयान देकर वाइको को पोटा में जेल हो सकती है तो प्रभाकरण को दोस्त बताने पर करुणानिधि पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, श्रीलंका सरकार भारत में आम चुनावों की प्रकिया के बीच ही प्रभाकरण का खात्मा कर देना चाहती है ताकि भारत में नई आने वाली नई सरकार के लिए श्रीलंका को कुछ कहने को न बचे।

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  • Web Title: तमिल मुद्दे पर राजनयिक व राजनीति दोनों कांपे