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हिंडोले पे मारके मचकी पढ़ेंगे बच्चे पोथी

गांव-देहात के नन्हे बच्चे झूलेंगे झूला, आंगनबाड़ी सेविकाएं गाएंगी लोरी। ‘कारी’ के बोल गुनगुनाएंगी वो और खेल-खेल में बच्चों को कठंस्थ कराएंगी गिनती-पहाड़ा। रोचक व मोहक वातावरण का निर्माण कर बच्चों के सर्वागीण विकास पर जोर दिया जायेगा। समाज कल्याण विभाग का यह अभिनव ताना-बाना है। वर्षा ऋतु में झूले के सांस्कृतिक महत्व की याद आयी है, सो, सूबे के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 10 से17 सितम्बर तक ‘झूलन सप्ताह’ मनाने का आदेश दिया गया है। वहीं गांधी जयंती पर बाल विकास कार्यक्रम आधारित जिला स्तरीय प्रदर्शनी भी होगी।ड्ढr ड्ढr सभी जिला योजना अधिकारी व सीडीपीओ को कार्यक्रम की रूपरखा भेजकर आईसीडीएस के निदेशक आर. लक्ष्मणन ने यथाशीघ्र तैयारी पूरी कर लेने का निर्देश दिया है। झूलन सप्ताह में झूला, पालना, गुड्डे-गुड़ियों की धूम सभी केन्द्रों पर होगी। सेविका-सहायिकाओं का दल बालगीत, लोरी, झूला गीत गाकर बच्चों में शिक्षा का अलख जाएगा। केन्द्र के बड़े बच्चे भी झूला-पालना झुलाने में सहयोग देंगे। लाभुकों की माताएं, गर्भवती महिलाएं व गांव की किशोरियां भी केन्द्रों को गुलजार करंगी। श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए केन्द्रों को पुरस्कृत किया जायेगा। यह काम पंचायत में गठित विशिष्ट कार्य समिति करगी। पुन: 2 अक्टूबर को जिलास्तरीय प्रदर्शनी में आंगनबाड़ी केन्द्रों की उपलब्धियां, स्कूल पूर्व शिक्षा, दुलार कार्यक्रम, मुस्कान एक अभियान, स्तनपान की महत्ता, एनिमिया व कुपोषण से बचाव की जानकारी भी दी जायेगी। फिर प्रतियोगिता का दौर चलेगा। मौके पर ‘हेल्दी बेबी कम्पटीशन’ का भी आयोजन किया जायेगा। प्रथम तीन प्रतिभागी पुरस्कृत होंगे। इन दोनों विशेष आयोजनों की बाबत विभाग ने राज्य के लिए छब्बीस लाख रुपये स्वीकृत किया है। प्रति परियोजना दो हाार व जिला प्रदर्शनी पर चालीस हाार रुपये खर्च होंगे। अंतत: जिलों की सफलता का आकलन राज्य स्तर पर कर तीन श्रेष्ठ प्रोग्राम अफसरों को भी पुरस्कार से नवाजा जायेगा।ं

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