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पुलिसकर्मियों ने लूटी महिला की इज्जत

बदहवाशी के आलम में वह कभी जोर-जोर से रोने-चीखने लगती है, तो कभी दर्द से कराह उठती है। बरियातू बड़गाईं बस्ती स्थित घर में खाट पर लेटी वह एक जिंदा लाश बन चुकी है। हैवानियत की सारी हदें पार कर 22 वर्षीय एक महिला की यह हालत बना दी है चार वर्दीवालों ने ही। बंधक बना पांच दिनों तक चार पुलिसकर्मी उसके साथ सामूहिक दुराचार करते रहे। जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तो मरने के लिए उसे एक ऑटो में बिठाकर चारों चंपत हो गये। रक्षक से भक्षक बने पुलिसकर्मियों की इस करतूत की जानकारी सीनियर एसपी एमएस भाटिया को दी गयी है। पीड़ित महिला के परिजनों ने न्याय की गुहार लगायी है। मिली जानकारी के अनुसार गया के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत मानपुर की यह महिला पटना-रांची सुपरफास्ट ट्रेन से 15 अगस्त की रात रांची पहुंची। उसका पति अशोक विश्वकर्मा दिल्ली में काम करता है। वह अपने भाई को राखी बांधने के लिए रांची आयी थी। रांची रलवे स्टेशन पर वर्दी वालों की नजर उस पर पड़ी। उसने पुलिसवालों से बड़गाईं का रास्ता पूछा था।वर्दी वाले उसे रास्ता दिखाने के बहाने कहीं और ले गये और पांच दिन तक उसके साथ मुंह काला किया। चार पुलिसकर्मी इसमें शामिल थे। जब उसकी स्थिति खराब हो गयी तो दो दिन पहले उसे ऑटो में बैठाकर बरियातू रोड में चेसायर होम के पास उतार दिया। वह किसी तरह बड़गाईं अपने भाई के घर पहुंची। उसका भाई यहां मंटू साव के घर किराये पर रहता था। लेकिन कुछ दिन पहले ही उसने बिरसा चौक के पास मकान ले लिया। वह अपने परिचित दशरथ शर्मा के घर बड़गाईं में ही रुक गयी। उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वह घटना की जानकारी अपने भाई को दे। फोन कर अपनी मां लीला देवी और पिता बरमेश्वर मिस्त्री को रांची बुलाया और वर्दीवालों की करतूत की जानकारी दी।

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