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सिर्फ कागचाों में ही मेट्रो का दचरा

सूबे की सरकार ने प्रदेश के महानगरों को दो साल पहले मेट्रोपोलिटन का दरा तो दे दिया, लेकिन इन शहरों की सूरत सँवारने के लिए सरकार ने कोई खास कदम नहीं उठाया। सरकार की योना कागाों में ही सिमट कर रह गई है।ड्ढr राय सरकार ने छह सितम्बर 2006 को सूबे के पाँच महानगरों को मेट्रोपोलिटन घोषित किया। क्षेत्र का समग्र विकास कराने के लिए उसमें नए इलाकेोोड़े गए। मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में महानगरों के पास केोिलों की नगर पंचायतों को शामिल कर दिया गया। लखनऊ में नगर निगम क्षेत्र के अलावा छावनी, सरोनी नगर, काकोरी, मलिहाबाद, बख्शी का तालाब,गोसाईंगां, मोहनलागां विकास खंडों कोोोड़ा गया। इसके साथ ही बाराबंकी का निदुरा, देवा विकास खंड और नगर पालिका परिषद नवाबगां पूरा क्षेत्र लखनऊ मेट्रोपोलिटन में शामिल कर लिया गया। इसी तरह सरकार ने कानपुर शहर और कानपुर देहात और उन्नावोिले के कई क्षेत्रों को कानपुर मेट्रोपोलिटन में शामिल कर लिया। इलाहाबाद, वाराणसी, आगरा और मेरठ महानगर भी इस योना में शामिल किए गए।ड्ढr इन महानगरों को मेट्रोपोलिटन का दरा देकर सरकार ने दावा किया था किोनता को बड़े महानगरों वाली सारी सुख सुविधाएँ वहीं मिलने लगेंगी। लेकिन हालत इसके विपरीत है। लखनऊ शहर के कुछ हिस्से को छोड़ कर बाकी क्षेत्र को आठ घंटे तक बिाली नहीं मिलती। सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। बरसाती पानी निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है। ड्ड

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