अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बीजिंग का विजेता

बीजिंग ओलम्पिक के बहाने दुनिया को चीन का नया चेहरा देखने को मिला है। वह खेलों की महाशक्ित बनकर उभरा है। गोल्ड मेडल के मामले में उसने अमेरिका को पछाड़ दिया। सोलह दिन चले इस खेल महाकुंभ के भव्य समापन, सफल आयोजन और दिलकश मेजबानी की चर्चा तो बरसों तक चलेगी किन्तु मैदानों में हुए चमत्कार तो कभी नहीं भुलाए जा सकेंगे। दुनिया के 205 देशों के जमावड़े में अव्वल रहने का गर्व मेजबान मुल्क को मिला है। चीन ने दिखा दिया कि वह सैन्य और आर्थिक महाशक्ित होने के साथ-साथ खेलों में भी सबसे आगे है। सिर्फ बीस बरस में उसने ओलम्पिक के सार समीकरण उलट दिए। कहने को 2वें ओलम्पिक खेल भारत के लिए भी सर्वाधिक सुखद रहे। एक स्वर्ण और दो कांस्य के साथ हमने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज कराया लेकिन अभिनव बिंद्रा, सुशील कुमार और विजेन्दर कुमार की सफलता उनकी व्यक्ितगत लगन और प्रतिभा का परिणाम है। सरकार या किसी संगठन को इसका श्रेय नहीं दिया जा सकता। चोटी पर चढ़ने के लिए चीन ने खेलों का जो ढांचा खड़ा किया उसका लाखवां हिस्सा भी हमार यहां नहीं है। सवा अरब की आबादी वाला अपना देश जमैका जसे छोटे मुल्क के सामने भी छोटा लगता है। जमैका के बोल्ट ने तो फर्राटा में इतिहास रचा ही, महिलाओं की 100 और 200 मीटर दौड़ के स्वर्ण भी इस देश के हिस्से में गये। छह स्वर्ण सहित 11 पदक जीतकर यह नन्हा देश पदक तालिका में 13वें स्थान पर रहा जबकि 50वां स्थान पाकर हम गर्व से फूल रहे हैं। लंदन ओलम्पिक से पहले खेलों की कायापलट के लिए कुछ फैसले किए जाने जरूरी हैं। बेवजह की बातों में वक्त बर्बाद कर रही युवा पीढ़ी को यदि पर्याप्त मैदान और समुचित सुविधाएं मुहैया करा दी जाएं तो चीन जसी सफलता पाना कठिन नहीं रहेगा। खर, बीजिंग ओलम्पिक पर लौटें तो ब्रिटेन की कामयाबी को जिक्र भी जरूरी हो जाता है। उसने एक लम्बी छलांग लगाई है और सौ वर्ष के अपने इतिहास में सर्वाधिक स्वर्ण बटोर हैं। प्रतियोगिता के दौरान 43 विश्व और 143 ओलम्पिक कीर्तिमान बनना अद्भुत मानवीय क्षमता का सबूत है। ओलम्पिक खेल इस क्षमता को मापने का अवसर देते हैं, इसीलिए अनोखे हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बीजिंग का विजेता