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सबको चाहिए अर्धसैनिक बल

मतदान बिल्कुल सिर पर है फिर भी जिलों से अर्धसैनिक बलों की मांग बंद नहीं हुई है। खासकर नक्सल प्रभावित इलाकों से ऐसी मांग जमकर हो रही है। पहले चरण के मतदान में हुए नक्सली हमलों के बाद हर जिले को ज्यादा से ज्यादा अर्धसैनिक बलों की जरूरत पड़ गई है। इस बार सूबे को 2004 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले ज्यादा अर्धसैनिक बल मिले हैं लेकिन दूसरी तरफ राज्य में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। आज की तारीख में राज्य के 31 जिलों में नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का असर है। पिछले कुछ चुनाव से एक आम धारणा यह भी बनी है कि चुनाव के समय नक्सलियों का मुकाबला तो केवल अर्धसैनिक बलों के जवान ही कर सकते हैं। मांग करने के पीछे एक कारण यह भी होता है कि यदि किसी लोकसभा क्षेत्र में कोई हिंसक घटना हो भी जाए तो वहां का जिला प्रशासन यह कह सकता है कि उसने तोड्ढr ड्ढr ज्यादा अर्धसैनिक बल की मांग कर रखी थी। अर्धसैनिक बलों की मांग को लेकर राज्य सरकार के पास तो ऐसे पत्र आ ही रहे हैं चुनाव आयोग भी जिलाधिकारियों की ऐसी मांग से परशान है। चुनाव आयुक्त नवीन चावला ने भी स्वीकार किया कि जब भी मतदान की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों के साथ बैठक होती है, ज्यादा से ज्यादा संख्या में अर्धसैनिक बलों की मांग होने लगती है। उन्होंने कहा कि गृह विभाग जितना अर्धसैनिक बल दे सकता था, उतना दे चुका है।ड्ढr ड्ढr प्रीमियर सेवा में शामिल करने की मांगड्ढr पटना (का.सं.)। आईसीडीएस इम्प्लाक्ष वेलफेयर एसोसिएशन ने राज्य सरकार से परियोजना पदाधिकारियों को प्रीमियर सेवा में शामिल करने की मांग की है। एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने वेतन समिति से मिलकर महिला पर्यवेक्षिकाओं और सांख्यिकी सहायकों को केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के अनुरूप वेतनमान देने की मांग की। एसोसिएशन के महासचिव अंजेश कुमार ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल संघ के अध्यक्ष दिवाकर प्रसाद सिंह समेत अन्य लोग शामिल थे।

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