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मिट जाएगा सुपौल-सहरसा का अस्तित्व

नेपाल के कुसहा के समीप टूटे पूर्वी कोसी बाहोत्थान बांध को समय रहते नहीं पाटा गया तो कोसी बराज सहित सुपौल और सहरसा शहर का अस्तित्व मिट जाएगा। 18 अगस्त को 60 मीटर की चौड़ाई में टूटे पूर्वी तटबंध की चौड़ाई 7 दिनों में बढ़कर 1200 मीटर यानि 1 कि.मी. से अधिक हो गयी है और तटबंध का कटाव तेजी से कोसी बराज की तरफ बढ़ रहा है। औसतन 200 मीटर के करीब प्रतिदिन बांध कट रहा है।ड्ढr ड्ढr युद्धस्तर पर तटबंध बचाने और नदी की धारा मोड़ने का काम शुरू नहीं होने से स्थिति भयावह होती जा रही है। रकार्ड के अनुसार 45 वर्ष के दौरान (1से 2008) 8 बार कोसी तटबंध टूटा है लेकिन इस बार की तबाही पिछले सार रिकार्ड को तोड़ कर दिया। नदी विशेषज्ञों की राय में इस बार कोसी खतरनाक रूप से आगे बढ़ रही है। कटाव स्थल से कोसी बराज की दूरी अब लगभग 11 किमी. ही बची है लेकिन कटाव की रफ्तार के आगे यह दूरी लगातार घटती जा रही है। इससे आने वाले कुछ ही दिनों में सुपौल और सहरसा शहर पर सीधा खतरा उत्पन्न हो सकता है। सुपौल और अररिया जिलों के कई प्रखंडों को अपने आगोश में लेने के बाद आक्रामक रूप से बढ़ रही कोसी मधेपुरा और सहरसा जिलों को अपनी चपेट में लेते हुए दक्षिण और पश्चिम की दिशा में जा रही है।ड्ढr ड्ढr उधर कुसहा (नेपाल) के कटाव स्थल की चौड़ाई लगातार बढ़ने से पानी का बहाव बेग और तेज हो गया है। कुल डिस्चार्ज का प्रतिशत पानी कटाव स्थल से बाहर निकल रहा है। प्रतिदिन दर्जनों गांवों के इसकी चपेट में आने का सिलसिला जारी है। 60 के दशक में तटबंध निर्माण के बाद पहली बार कोसी इतनी भयावह रूप अख्तियार करते हुए सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा और पूर्णियां जिलों के कुछ भागों को अपनी चपेट में ले लिया है।ड्ढr ड्ढr सरकार की पूरी मिशनरी अभी राहत कार्य में जुटी है लेकिन कटाव स्थल को पाटने और नदी के बहाव को कोसी बराज की तरफ करने का कोई प्रयास नहीं हो रहा है। बाढ़ नियंत्रक विशेषज्ञ की बात तो दूर वरिष्ठ अभियंता तक वहां मौजूद नहीं है। यही हाल रहा तो अभी 25 लाख आबादी इसकी चपेट में आयी है। अगले कुछ दिनों में 50 लाख लोग बह जाएंगे।

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