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मानवाधिकार संगठनों ने नहीं सराहा बीजिंग ओलंपिक

चीन ने बीजिंग ओलंपिक में भले ही स्वर्ण पदक तालिका में सर्वोच्च स्थानहासिल किया हो, लेकिन मानवाधिकार संगठनों से वह बिल्कुल भी सराहना नहीं हासिल कर सका। हांगकांग स्थित ‘ह्यूमन राइट्स इन चाइना’ ने कहा कि चीन ने खुलकर और बड़ी सफलतापूर्वक ओलंपिक खेलों का उपयोग अपने राजनीतिक लक्ष्यों का अहसास कराने के लिए किया। एचआरआईसी के कार्यकारी निदेशक शेरोन होम के मुताबिक सावधानी बरतने के बावजूद वह खुद की मानवाधिकारों को कुचलने वाली छवि पर परदा नहीं डाल सका। संगठन की ओर से कहा गया है कि चीनी जनता को इन खेलों की मेजबानी के लिए बेतहाशा आर्थिक, पर्यावरण और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ी। डीपीए के अनुसार वर्ष 2001 से 15 लाख बीजिंगवासियों को ओलंपिक स्थलों के निर्माण के नाम पर जबरन उनकी जगह से हटाया गया और इसके बदले में उनको या तो मामूली हराना दिया गया। एचआरआईसी का कहना है कि बीजिंग को हरा-भरा करने के नाम पर 20 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी खर्च किया। ओलंपिक के दौरान मीडिया के अधिकारों का उल्लंघन और प्रदूषण को लेकर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने चुप्पी साधे रखी।

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