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भूलोगे तुम, फिर भी तुम्हारे रहेंगे सदा

ल खेल में हम हों ना हो गर्दिश मे तारे रहेंगे सदा,ड्ढr भूलोगे तुम भूलेगें वो फिर भी तुम्हारे रहेगें सदा।ड्ढr जी चाहे तुम हमको आवाज दो,ड्ढr हम हैं वहीं हम थे जहां॥ भले ही दर्द भरे नगमों के बेताज बादशाह मुकेश आज हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनके गीत श्रोताआंे को सदा उनकी याद दिलाते रहेगें। बचपन के दिनों से प्रसिद्ध गायक और अभिनेता केएल सहगल से प्रभावित मुकेश उनकी तरह गायक कलाकार बनना चाहते थे। हिन्दी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता मोतीलाल ने मुकेश की बहन की शादी मंे उनके गानांे को सुना और उनकी आवाज से इतने प्रभावित हुए कि उन्होने मुकेश को मुंबई बुला लिया। मोती लाल मुकेश के दूर के रिश्तेदार भी थे। फिल्मों मंे कदम रखने के पहले मुकेश पीडब्लूडी में एक सहायक के रूप मे काम करते थे। वर्ष 10 में अभिनेता बनने की चाह लिए उन्हांेने मुंबई का रूख किया। मोती लाल ने मुकेश को अपने घर मे ही रखकर उनके लिए संगीत की शिक्षा की व्यवस्था की और वह पंडित जगन्नाथ प्रसाद से संगीत की शिक्षा लेने लगे। इन सबके बीच मुकेश को बतौर अभिनेता वर्ष 1मे प्रदर्शित फिल्म ‘निदर्ोष’ मंे काम करने का मौका मिला, लेकिन इस फिल्म के जरिए वह कुछ खास पहचान नहीं बना पाए। अनिल विश्वास के संगीत निर्देशन मंे मुकेश ने अपना पहला ‘दिल जलता है तो जलने दे’ वर्ष 1मे प्रदर्शित फिल्म ‘पहली नजर’ के लिए गाया। इसे महज एक संयोग कहा जाए कि यह गाना अभिनेता मोतीलाल पर ही फिल्माया गया। फिल्म की कामयाबी के बाद मुकेश रातांेरात गायक कलाकार के रूप मंे अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। 22 जुलाई 1ो दिल्ली मे एक मध्यम परिवार में जन्में मुकेश अपने सिने कैरियर के शुरूआती दौर की फिल्मों मंे सहगल के अंदाज मे ही गीत गाया करते थे, लेकिन वर्ष 1में नौशाद के संगीत निर्देशन मंे फिल्म ‘अंदाज’ मंे गाए उनके गीत ‘तू कहे अगर जीवन भर, झूम-झूम के नाचो आज, हम आज कहीं दिल खो बैठे’ जैसे सदाबहार गानों की कामयाबी के बाद मुकेश ने गायकी का अपना अलग अंदाज बनाया। मुकेश के दिल मंे यह ख्वाहिश थी कि वह गायक के साथ साथ अभिनेता के रूप मे भी अपनी पहचान बनाए। वर्ष 1मे प्रदर्शित फिल्म आवारा की कामयाबी के बाद उन्हांेने गायकी के साथ-साथ ही अभिनेता बनने की आेर कदम बढ़ाया। बतौर अभिनेता वर्ष 1मंे प्रदर्शित माशूका और वर्ष 1मंे प्रदर्शित फिल्म अनुराग की विफलता के बाद उन्होंने गाने की आेर पुन: ध्यान देना शुरू कर दिया। इसके बाद वर्ष 1मे प्रदर्शित फिल्म यहूदी के गाने ‘ए मेरा दीवानापन है’ की कामयाबी के बाद मुकेश को एक बार फिर से बतौर गायक अपनी पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने एक से बढकर एक गीत गाकर श्रोताआे को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने अपने तीन दशक के सिने कैरियर मंे 200 से भी यादा फिल्मों के लिए गीत गाए। मुकेश को उनके गाए गीतो के लिए चार बार फिल्म फेयर के सर्वश्रेष्ठ पाश्र्व गायक के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मुकेश को सबसे पहले वर्ष 1मे प्रदर्शित फिल्म अनाड़ी के ‘सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी’ गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ पाश्र्व गायक के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके बाद वर्ष 10 मे प्रदर्शित ‘पहचान’ के गाने सबसे बड़ा नादान, वर्ष 1मे फिल्म बेईमान के गाने ‘जय बोलो बेइमान की’ गाने और वर्ष 1मे प्रदर्शित फिल्म ‘कभी कभी’ के गाने ‘कभी कभी मेरे दिल मे ख्याल आता है’ के लिए भी मुकेश सर्वश्रेष्ठ पाश्र्व गायक के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए। इसके अलावा वर्ष 1मे प्रदर्शित ‘रजनी गंधा’ के गाने कई बार यूं देखा है, के लिए वह राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए। मुकेश के पसंदीदा संगीत निर्देशक के तौर पर शंकर जयकिशन और गीतकार मंे शैलेन्द्र का नाम सबसे पहले आता है। वर्ष 1मे प्रदर्शित फिल्म बरसात मुकेश, शैलेन्द्र और शंकर जयकिशन की तिकड़ी की पहली हिट फिल्म थी। इसके बाद वर्ष 1मे फिल्म आवारा की कामयाबी के पश्चात मुकेश, शैलेन्द्र और शंकर जयकिशन की जोडी ने अपने गीत-संगीत से श्रोताआंे को भाव विभोर कर दिया। शंकर जयकिशन और पाश्र्वगायक मुकेश की जोड़ी के न भूलने वाले गानों की लंबी फेहरिस्त में शामिल कुछ गीत हैं। हम तुमसे मोहब्बत करके सनम, आवारा हूं. आवारा, 1रमैया वस्ता वइया, मेरा जूता है जापानी श्री 420, ए मेरा दीवानापन है यहूदी 1सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी, किसी की मुस्कुराहटो पे हो निसार, अनाड़ी 1‘जाउ कहां बता ए दिल’. ‘छोटी बहन’ 1‘रूक जा आे जाने वाली रूक जा’ कन्हैया 1‘दुनिया वालो से दूर’ उजाला 1‘तेरी याद दिल से भूलाने चला ह’ हरियाली और रास्ता 1‘दोस्त दोस्त ना रहा’, ‘आे मेहबूबा आे मेहबूबा’ संगम 1‘दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन मे समाई’ तीसरी कसम 1‘जोशे जवानी हाय रे हाय’ एराउंड द वर्ल्ड 1‘जाने कहा गए वो दिन’ मेरा नाम जोकर 10 शामिल है। वर्ष 1मे बतौर अभिनेता फिल्म निदर्ोष से अपने कैरियर की शुरूआत करने वाले मुकेश बतौर अभिनेता सफल नहीं हो सके। उन्हांेने बतौर अभिनेता दुख-सुख 1आदाब, अर्ज 1माशूका 1आह 1आक्रमण 1दुल्हन 1फिल्मों में काम किया। बतौर निर्माता उन्होंने वर्ष 1मे मल्हार और वर्ष 1मंे आक्रमण फिल्में भी बनाई। इसके साथ ही इसी फिल्म के लिए उन्होने संगीत भी दिया। यूं तो मुकेश ने दिलीप कुमार, राजेन्द्र कुमार, शम्मी कपूर, राजेश से लेकर राजकुमार तक के लिए गाने गाए। जहां राजकपूर और मनोज कुमार पर मुकेश की आवाज खूब जमती थी, वहीं राज कपूर और मनोज कुमार भी अपनी फिल्मो के लिए उनके गाए जाने की मांग किया करते थे। 26 अगस्त 1ो राज कपूर की फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम के गाने ‘चंचल निर्मल शीतल’ की रिकॉर्डिग पूरी करने के बाद मुकेश अमरीका मे हो रहे कन्सर्ट मे भाग लेने के लिए चले गए। म्यूजिक कन्सर्ट के दौरान उन्होंने शायद यह महसूस कर लिया था कि मौत उनके काफी करीब है, इसीलिए अमरीका मंे छुट्टियां मना रहे अपने पुत्र नितिन मुकेश को उन्हांेने वहां बुला लिया था। कन्सर्ट मे अपने अंतिम कार्यक्रम के रूप मे मुकेश ने मंच पर अपना पसंदीदा गीत ‘जाने कहां गए वो दिन’ पेश करने से पहले नितिन को इस गीत मंे साथ देने के लिए कहा। सुरों के उतार-चढाव से परिपूर्ण इस गाने का मुखड़ा मुकेश ने बड़ी ही तबीयत से गाया लेकिन पहले ही अंतरे के बाद वे रूक गए और उनके संकेत को समझकर गीत के आगे की कड़ी नितिन ने पूरी की। उसी समय नितिन को यह आभास हो गया कि अब आगे की जिम्मेदारी उठाने का समय आ चुका है। इस कन्सर्ट के ठीक चार दिन बाद 27 अगस्त 1में मुकेश को अमरीका मे दिल का दौरा पड़ा और वह दुनिया के संगीत प्रेमियो को अपने प्यारे गीत ‘आे जाने वाले हो सके तो लौट के आना’ की स्वर लहरियो मे छोड़कर अलविदा कह गए।ं

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