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गौरवशाली एक साल

एक तिहत्तर वर्ष पुराने अखबार के जीवन में एक साल का महत्व कितना होता है? ऊपरी तौर से वह भले ही सागर में बूॅंद सरीखा दिखता हो, लेकिन अगर वह वर्ष ईमानदार आत्मनिरीक्षण और पुनर्रचना का वर्ष भी रहा हो, तो उसका अखबार के जीवन में काफी महत्व होता है। वर्ष 2008 हिन्दुस्तान के लिए ऐसा ही वर्ष रहा। आज से ठीक एक वर्ष पहले अपनी निरंतर आगे बढ़ती यात्रा में चण्डीगढ़ को शामिल करते हुए हिन्दुस्तान ने चण्डीगढ़ संस्करण की शुरुआत की थी। और उसकी रचना के साथ ही ‘हिन्दुस्तान’ के सभी मौजूदा संस्करणों को भी नए रंग-रूप और आकार में ढाला। तो एक तरह से 21 अप्रैल, 2008 सिर्फ चण्डीगढ़ संस्करण के जन्म ही नहीं, बल्कि हिन्दुस्तान के अन्य सभी दिल्ली, एन.सी.आर., यू.पी., बिहार तथा झारखंड के संस्करणों के लिए भी एकदम नए तेवर-कलेवर सहित पाठकों से रू-ब-रू होने की तारीख थी।ड्ढr ड्ढr एक जीवंत पुराना अखबार दो स्तरों पर सतत आगे बढ़ता रहता है : एक तो वह चिरंतन स्तर है, जिससे उसके बुनियादी मूल्य, सरोकार और दृष्टि जुड़े हुए हैं और दूसरा नवोन्मेष का वह स्तर है, जो नए समय और नए पाठकों के साथ कदमताल करने की इच्छा और उत्सुकता के द्वारा उसे निरंतर प्रयोगधर्मिता और नए विचारों का वाहक बनाता है। चण्डीगढ़ से मिले उत्साहानक पाठकीय सहयोग ने ही हमें फिर एक के बाद एक देहरादून और इलाहाबाद से दो नए संस्करणों की शुरुआत की प्रेरणा दी। इसके साथ ही लगातार बढ़ रहे मेरठ और आगरा संस्करणों के अनेक उपसंस्करण भी इसी वर्ष शुरू किए गए।ड्ढr ड्ढr कई बार असंगत, अराजक, अर्थशून्य लगने वाले कालखण्ड के दौरान भी सच्ची इच्छा और मेहनत के बूते एक नई और सार्थक शुरुआत की जा सकती है। और तमाम प्रवाद और विवाद झेलकर भी एक अखबार उभरती नई पीढ़ी के बीच भी अपनी एक विनयशील, विवेकपूर्ण, अर्थसंगत जगह बना सकता है। आज का हिन्दुस्तान इसका प्रमाण है। और यह सफलता हमारी ही नहीं हमार सभी स्वप्नदर्शी सुधी पाठकों की है जो हिन्दी के अखबारों में आधुनिक विचारों और सार्थक पुरानी परंपराओं का सूझबूझभरा समन्वय चाहते हैं।

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  • Web Title: गौरवशाली एक साल