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ओलंपिक पदक विजेताओं का जोरदार स्वागत

अब अगले चार साल जी तोड़ मेहनत करनी है और बीजिंग में मिले कांस्य को लंदन में स्वर्ण पदक में बदलना है। भारतीय पहलवान सुशील कुमार ने भारत की धरती पर कदम रखते ही अपने इरादे जता दिए। ओलंपिक में नए सितारे बनकर उभरे पहलवान सुशील कुमार का सोमवार देर रात को स्वदेश लौटने पर जोश और उत्साह के बीच भव्य स्वागत किया गया। मंगलवार की सुबह बापरोला गांव में उन्हें गुरु सतपाल के साथ हाथी पर बैठा कर घुमाया गया इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ऐसा अभूतपूर्व माहौल था जो भारतीय खेलों के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया था। सुशील और विजेन्दर के स्वागत में पलक पावड़े बिछाए बापरोला गांव और भिवानी के लोग अपने वीरों को देखने के लिए इस कदर बेचैन थे कि उन्हें कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की भी कोई परवाह नहीं थी। सुशील जैसे ही अपने गुरु महाबली सतपाल के साथ वीआईपी लांज से बाहर निकले तो उनके प्रशंसकों के दबाव में पुलिस का सुरक्षा घेरा टूट गया। मंगलवार को छत्रसाल स्टेडियम के अखाड़े पहुंचे सुशील ने कहा - छत्रसाल स्टेडियम मेरा दूसरा नहीं पहला घर है। यहां रहते हुए गुरु सतपाल से सीखे गुर ही ओलंपिक में कांस्य दिला पाए हैं। अब 2012 में लंदन में होने वाले ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के लिए जोर लगाना है। हालांकि इससे पहले 2010 में दिल्ली में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों में भी स्वर्ण जीतना है। अपने जोरदार स्वागत से गदगद सुशील ने कहा - कभी सोचा नहीं था कि ओलंपिक पदक जीतने पर पूर देश में ऐसी खुशी की लहर दौड़ेगी। मेरा पदक देशवासियों की शुभकामनाओं और गुरु सतपाल की मेहनत का नतीजा है। - बीजिंग में मुकाबलों के दौरान मालिशिए की कमी पर सुशील ने कहा - इससे कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि मैनेजर करतार सिंह और मेर गुरु सतपाल और रामफल वहां मौजूद थे। इन्होंने मेरा हौसला बनाए रखा। एयर चाइना की उड़ान के लगभग साढ़े बारह बजे हवाई अड्डे पहुंचने पर खेल मंत्री एम एस गिल, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के महानिदेशक सायन चटर्जी और खेल मंत्रालय के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। सतपाल ने कहा कि मैंने अपनी जिंदगी में इतना बढ़िया मुकाबला लड़ते किसी पहलवान को नहीं देखा था। सुशील ने अमेरिका, रूस और तजाकिस्तान के पहलवानों को डेढ़ घंटे के अंदर फतह कर लिया था। यह सही मायनों में एक ऐतिहासिक जीत थी। 1े नई दिल्ली एशियाड के स्वर्ण पदक विजेता पहलवान सतपाल ने कहा - सुशील की इस जीत से देश में कुश्ती के प्रति जोश का नया दौर शुरू होगा। पहलवानों को उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है कि भारतीय भी ओलंपिक कुश्ती में पदक जीत सकते हैं। इसके बाद सुशील कुमार और मुक्केबाज विजेन्दर कुमार ने मंगलवार को यहां राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, उपराष्ट्रपति डा. हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से भेंट की। इन सभी ने दोनों ओलंपिक पदक विजेताओं की जमकर तारीफ की। उधर विजेंदर के पिता को अपने बेटे से मिलने के लिए दिल्ली पुलिस से जद्दोहद करनी पड़ी। पिता महीपाल, भाई मनोज और चाचा रमेश मुक्केबाज विजेन्दर के स्वागत के लिए वीआईपी लॉंज में जाने की जद्दोहद में लगे थे। उनकी पुलिस के जवानों के साथ तीखी बहस हो गई और वे धक्का मुक्की करते हुए बैरीकेड पार कर अंदर घुस गए। पुलिसकर्मी उन्हें तत्काल अपने घेरे में लेते हुए एक किनारे ले गए। इससे विजेन्दर के भाई चिल्लाने लगे, मेर भाई ने देश के लिए पदक जीता है, इतिहास बनाया है। इतना ही नहीं विजेन्दर के पिता के साथ भी बदसलूकी की जा रही है। माहौल में पूरी तरह से अफरा-तफरी हो गई थी।

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