अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बेटों से मिलने के लिए किया चार घंटे इंतजार

रात के 12.30 बजे हैं। मैं ऑफिस की गाड़ी से एयरपोर्ट पहुंचता हूं। एयरपोर्ट पर उत्सव जसा माहौल है। यहां एसा नजारा मैंने पहले कभी नहीं देखा। हर आदमी के कदम आईजी एयरपोर्ट के वीआईपी लॉंज की तरफ बढ़ रहे हैं। हर कोई बीजिंग के स्टारों पहलवान सुशील कुमार, मुक्केबाज विजेन्दर, अखिल और जितेन्दर का दीदार कर लेना चाहता है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ-साथ प्रिंट मीडिया के नुमाइंदे भी काफी संख्या में यहां मौजूद हैं। इसी समय मेर मोबाइल पर एक फोन आता है। यह फोन किसी और का नहीं मुक्केबाज अखिल का है। कहते हैं, भाई साहब प्लेन लैंड कर गया है। सबसे पहले आपको फोन करने का अपना वादा मैंने पूरा किया। अखिल का मोबाइल चालू है लेकिन मुझे कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा। मैंने कहा, मैं तुमसे बाद में बात करता हूं। इसके बाद मुझे एयरपोर्ट पर किसी से भी बात करने का मौका नहीं मिला। लगभग तीन घंटे तक मैं एयरपोर्ट का नजारा देखता रहा। धक्का-मुक्की, ढोल-नगाड़े, प्रशंसकों की पुलिस से झड़प सबकुछ देखने को मिला। लेकिन सबसे अजीब था बेटों के एयरपोर्ट पहुंच जाने के बाद भी मां-बाप का अपने बेटों से रूबरू होने के लिए घंटों इंतजार। अखिल के माता-पिता और जितेन्दर के पिता हाथों में गुलदस्ता और फूलमालाएं लिए अपने बेटे से मिलने का इंतजार करते रहे। फूल मुरझाने लगे लेकिन उन्हें अपने बेटे से मिलने का समय नहीं मिला। और जब मिला तो क्षण भर के लिए। जसे ही अखिल अपने माता-पिता के सामने आए उन्होंने सबसे पहले उनके पैर छुए। माता-पिता ने अपने बेटे को गले से लगाया। पिता-पुत्र के आंखों में आंसू साफ देखे जा सकते थे। इसके बाद अखिल और अन्य मुक्केबाजों को फिर से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने घेर लिया। हां, इस बीच विजेन्दर को तो भारतीय बॉक्िसंग फेडरशन के अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला अपने साथ गाड़ी में पहले ही ले गए थे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बेटों से मिलने के लिए किया चार घंटे इंतजार