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भारत ने श्रीलंका में जीती पहली वनडे सीरीचा

श्रीलंका में चल रही एकदिवसीय श्रृंखला के चौथे मैच में भारत ने 46 रनों से जीत दर्ज कर भारत ने यह श्रृंखला अपने नाम कर ली। 3-1 से श्रृंखला अपने नाम कर भारत ने पहली बार श्रींलका में श्रृंखला जीत का इतिहास रच दिया। श्रीलंका की पारी 212 रन पर सिमट गई। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, सुरेश रैना और युवा बल्लेबाज विराट कोहली के शानदार अर्धशतकों से मिली मजबूत बुनियाद के बावजूद निचले क्रम की भारी असफलता ने भारत को श्रीलंका के खिलाफ चौथे एकदिवसीय क्रिकेट मैच में बुधवार को यहां विशाल स्कोर बनाने से रोक दिया। एक समय 40 ओवर में तीन विकेट पर 215 रन की सुखद स्थिति वाली टीम के बल्लेबाजों ने हाराकिरी करते हुए विकेट गंवा दिए और भारत पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल सका। हालांकि भारत 4ओवरों में 258 रन का ठीक-ठाक स्कोर खड़ा करने में जरूर सफल रहा। लेकिन इसका श्रेय भी रैना के 76, धोनी के 71 और अपना पहला अर्धशतक जमाने वाले विराट के 54 रनों को ही जाता है। इससे पहले भारत ने टॉस जीतकर जब बल्लेबाजी करने का फैसला किया तो विराट ने साथी ओपनर गौतम गंभीर के साथ 44 रन जोड़कर उसे अच्छी शुरुआत दी। टेस्ट सीरीज में जबर्दस्त सफलता पाने वाले गंभीर का वनडे सीरीज में खराब प्रदर्शन जारी रहा और वह इस बार भी महज 17 रन ही बना सके। इसके तीन ओवर बाद ही आउट आफ फॉर्म चल रहे उपकप्तान युवराज सिंह भी चलते बने। इस बार तो वह बिना कोई रन बनाए ही चामिंडा वास के शिकार बन गए। मगर इन सबसे बेखबर 1वर्षीय विराट ने बेखौफ अंदाज में बल्लेबाजी जारी रखी। इस दौरान उन्होंने अपना पहला वनडे अर्धशतक भी पूरा कर लिया, लेकिन सात चौकों की मदद से 54 रन बनाने के बाद वह तिलन तुषारा की गेंद पर बोल्ड हो गए। भारत का तीसरा विकेट 81 के स्कोर पर गिरा और वह संकट की तरफ बढ़ता हुआ दिख रहा था। लेकिन कप्तान धोनी ने रैना के साथ मिलकर पारी को संभाल लिया। इन दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंका की रहस्यमयी स्पिन जोड़ी अजंता मेंडिस और मुथैया मुरलीधरन का बखूबी सामना करते हुए शुरुआती सतर्कता के बाद मनचाहे अंदाज में रन बनाए। धोनी और रैना ने चौथे विकेट के लिए 143 रन जोड़कर विपक्षी कप्तान माहेला जयवर्धने के माथे पर पसीना ला दिया। लेकिन स्लाग ओवरों में तेजी से रन बनाने की जल्दबाजी में ये दोनों ही तुषारा के शिकार बन गए। रैना ने 78 गेंदों पर छह चौकों और एक छक्के की मदद से 76 रन की आकर्षक पारी खेली। इसकेथोड़ी देर बाद धोनी भी 80 गेंदों पर चार चौकों के सहारे 71 रन बनाकर कैच आउट हो गए। इन दोनों जमे-जमाए बल्लेबाजों के क्रीज से विदा होते ही भारतीय खेमे में मानो हड़कंप मच गया। रोहित शर्मा और सुब्रमण्यम बद्रीनाथ जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाजों को भी कुछ नहीं सूझ रहा था। रोहित 18 रन बनाकर मेंडिस के जाल में फंस गए जबकि बद्रीनाथ (6) मुरली के शिकार बने। इसके बाद तो आयाराम-गयाराम की कहावत प्रेमदासा स्टेडियम में चरितार्थ होने लगी। हरभजन सिंह दो रन बनाकर रनआउट हो गए जबकि प्रवीण कुमार (2) और जहीर खान (0) तो तुषारा का अंतिम ओवर भी नहीं झेल सके। इस मैच में श्रीलंका को कुछ हद तक वापस लाने का श्रेय तेज गेंदबाज तुषारा को जाता है जिन्होंने 47 रन देकर पांच विकेट झटके। उनके अलावा मेंडिस, मुरली, वास और नुवान कुलशेखरा को एक-एक विकेट मिला। वास ने युवराज को आउट करने के साथ ही वनडे क्रिकेट में अपने 400 विकेट पूरे कर लिए।

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