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राजरंग

बाबा नहीं बदलेंगे.. पोलटिक्स में तो खुदे पर भरोसा नहीं होता, ऐसे में बाबा के बाबा के बात पर केतना भरोसा करं वजीर लोग। ओइसे तो बाबा पहिलहीं बोले हैं कि घबड़ाये के कवनो बात नहीं है। कुछुओ इधर से उधर नहीं होगा। सबका विभाग उभाग उहे सब रहेगा। टेंशन लेबे के जरूरत नहीं है।.. बाबा के बात कइसे उठाते, ना-नुकुर करते-करते बाबा के साथे आवे ला तइयार हो गये।.अब बाबा बड़की कुर्सी पर विराजमान हो गये हैं। छोट-छोट बात पर केतना दिमाग लगायेंगे। सब लोग को सौगंध दिलवाइये दिये हैं। विभगवा भी बांटिये देंगे। लेकिन वजीर लोग के दिलवा में धुकधुकी लगल है कि विभगवा बांटे में कहीं बाबा के मन न बदल जाये। कहीं जनहित और पारदर्शिता के नाम पर विभगवा में कुछ हेरफेर हो गया, तो बहुते मुश्किल हो जायेगी। केतना लोग को जुबान दिये हैं। उसका का होगा? बाबा के सामने हनी भाई वाला मामला तो है नहीं कि जो चाहते थे हाथ पकड़ के करवा लेते थे।

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