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पथराई आंखों में अब भी आतंकियों का खौफ

दहशत भरे 20 घटों के दर्दनाक मंजर को वे बच्चे और अन्य बंधक याद नहीं रखना चाहते जिन्हंे चिन्नौर के इस घर से तब मुक्ित मिली, जब सभी आतंकी ढेर कर दिए गए थे। दो वर्षीय विपिन और चार वर्षीय काजल तो जैसे दिमाग से ही सुन्न हो चुके हैं। सात साल का अशद भी दहशत स उबर नहीं पाया है। नौ साल की शीतल जब 20 घंटां की दर्दनाक और दहशतभरी दास्तान सुनाती थी ता अचानक सिहर उठती थी। वह बताती हैं, ‘हम किचन मं थ, तभी काई गट पर आया। हमं लगा कि आर्मी वाल हैं। लकिन व उग्रवादी थ जा दरवाजा ताड़कर अंदर घुस आए थे। उन्हांन फायरिंग करनी शुरू कर दी और एक लड़क का मार दिया। हमं किचन स बाहर आन का कहा गया। हम बाहर आए ता उन्हांन गालियां चलानी शुरू कर दीं।’ बच्चों के चाचा न बताया कि आतंकियों ने तीन लागां का मार दिया। हम दूसर कमर मं थ और हमन दरवाजा बंद कर रखा था। उन्हांन दरवाजा ताड़न की काशिश की। हम कमर क एक कान मं दुबक हुए थ। व बस ताबड़ताड़ गालियां बरसा रह थ। घर मं हम कुल नौ लाग थ। टांग मं गाली लगन स घायल बच्चां की मां सुनीता कहती हैं, ‘उग्रवादियां न हमार सामन तीन मासूमां की निर्मम हत्या कर दी। हम रसाई घर मं थ। हमन वहां स बाहर दखा जहां सना क जवान मुस्तैद थ। हम मदद की गुहार लगाना चाहत थ लकिन आतंकवादियों न हमं धमकाया और वहां स हटन का कहा। पहली बार मं उनका कहा न मानन पर उन्हांन एक बच्च का गाली मारी थी जिससे हम काफी डर गए थ, इसलिए हमं उनकी बातड्ढr माननी पड़ी।’ बच्चां की चाची रितु बताती हैं कि हमं घर क अंदर रहन का मजबूर कर दिया गया था। हम पूर घर मं इधर-उधर जान बचान क लिए भागन लग ता उन्हांन हमं एक कमर मं रहन को कहा। बच्चां का पानी तक नहीं पीन दिया। आतंकवादी हमं धमकी दे रहे थे और हम उनस अपनी जान की भीख मांग रह थ। हमन उनस कहा कि वे हमारा सारा सामान ल लं, रुपए-पैस सब ल जाएं, पर हमारी जान बख्श दं। बच्चां क पिता बिल्ला राम, जो कि तब घर पर नहीं थे, सेना का धन्यवाद करते हुए कहते हैं कि वह तो उम्मीद खा चुके थे। पर यह ईश्वर की असीम कृपा है कि बच्च सुरक्षित हैं। ड्ढr दरअसल 20 घंटां तक चल बंधक प्रकरण की मुक्ित क लिए सना न अंतिम हथियार क तौर पर बहाशी की गैस का इस्तमाल किया था। बहाशी की गैस का इस्तमाल कर भीतर धावा बालन वाला सना का जवान भी शहीद हा गया। इस अभियान की प्ररणा सना न वर्ष 2002 मं मास्का मं हुए थियटर प्रकरण स ली थी जिसमें चेचेन उग्रवादियों ने कई बच्चों को बंधक बना लिया था। बच हुए अंतिम आतंकी का मार गिरान क लिए कमांडा ने यह रणनीति उस समय अपनाई जब किसी प्रकार जान बचाकर बाहर निकलन मं कामयाब हुई एक बूढ़ी औरत न बच हुए आतंकी क घायल हान तथा बंधक की स्थिति की जानकारी दी। रात सवा 11 बज क करीब टरिटारियल आर्मी क जवान राम मुरली न गैस स हमला बालन का साहस दिखाया ता वह खुद भी शहादत पा गया क्यांकि बहाशी की गैस न उस पर भी असर दिखा दिया था। कमांडा कार्रवाई क एक घंट क बाद रात बारह बज क करीब ही सना मकान मं घुसी थी।

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