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सूबे की बाढ़ राष्ट्रीय आपदा घोषित

नीतीश कुमार ने रेल मंत्री से भी मांगी मददड्ढr कोसी की विनाशलीला देखने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस प्रलंयकारी बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया और बिहार के लिए खजाना खोलते हुए तत्काल एक हाार दस करोड़ रुपये तथा सवा लाख टन अनाज मुहैया कराने की घोषणा की। इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रल मंत्री लालू प्रसाद से पूर्णिया व सहरसा के लिए ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का भी अनुरोध किया।ड्ढr ड्ढr प्रधानमंत्री अपने निर्धारित कार्यक्रमानुसार पूर्वान्ह 10.50 बजे पूर्णिया के चूनापुर सैन्य हवाईअड्डे पर विशेष विमान से उतर। उनके साथ संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, गृह मंत्री शिवराज पाटिल, रल मंत्री लालू प्रसाद, रसायन एवं उर्वरक मंत्री रामविलास पासवान, जल संसाधन मंत्री जयप्रकाश, बिहार में प्रतिपक्ष की नेता राबड़ी देवी भी मौजूद थीं। वहां बिहार सरकार की ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने उनकी अगवानी की। इसके फौरन बाद प्रधानमंत्री, संप्रग अध्यक्ष तथा अन्य लोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सव्रेक्षण के लिए निकल पड़े। करीब सवा घंटे बाद वे लोग वापस चूनापुर लौट आए। बाद में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अनिल शर्मा ने पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री ने मानवीय आधार पर राज्य सरकार को राहत एवं बचाव कार्य के लिए हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया है। अभी तत्काल केन्द्र की ओर से 1010 करोड़ की मदद दी जाएगी। साथ ही दो माह तक प्रभावित इलाकों के रिलीफ सेंटरों पर खर्च के लिए 540 करोड़, विस्थापितों की शरण के लिए 420 करोड़ तथा मवेशियों के चार के लिए अलग से राशि मुहैया कराई जाएगी। इसके बाद भी जरूरत पड़ी तो केन्द्र पीछे नहीं हटेगा। उधर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रलमंत्री लालू प्रसाद से बाढ़पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए रलवे से पूर्णिया और सहरसा मार्ग पर ट्रनों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया है। उक्त जिलों समेत सभी सुरक्षित इलाकों में मेगा राहत कैम्प खोले जायेंगे, जहां दस लाख लोगों को लम्बे समय तक ठहराने के और बुनियादी इंतजाम होंगे। पूर्णिया से लौटने के बाद श्री कुमार ने पटना हवाईअड्डे पर संवाददाताओं से कहा कि संकट के आकलन में कोई चूक नहीं हुई है। हम ऐसे आरोपों का सही समय पर जवाब देंगे। राहत कार्यो में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा। मुख्यमंत्री ने देशवासियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और राजनीतिक दलों से मदद की अपील करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में राजनीति नहीं होनी चाहिए। हालांकि केन्द्र से 25 हजार टन अधिक अनाज मिलने की घोषणा पर उन्होंने खुद ही चौंकाने वाली टिप्पणी कर डाली कि चुनावी मौसम है।ड्ढr इसलिए यूपीए सरकार में शामिल कुछ लोग दिखाना चाहते हैं कि हमने अधिक दिलवा दिया। उन्हें हास्यास्पद बयानबाजी से बचना चाहिए। श्री कुमार ने बताया कि 1.26 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सुपौल में फंसे लोगों को विशेष प्राथमिकता देकर निकाला जा रहा है।ड्ढr ड्ढr उन्होंने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमने तत्काल राहत के लिए एक हजार करोड़ रुपये मांगे थे। अभी तो उसी की घोषणा हुई है। यहां अनाज-दवा की कोई कमी नहीं है। लोगों को लम्बे समय तक राहत कैम्पों में रखना होगा जिसके लिए टेन्ट की कमी है। केन्द्र से पिछले वर्ष के राहत मद के 2100 करोड़ रुपये भी अब तक नहीं मिले हैं। इस बार सड़क, मकान, पुल-पुलियों को जबरदस्त क्षति हुई है। मरम्मत के लिए काफी धन चाहिए। सिर्फ कृषि क्षेत्र को 0 करोड़ रुपये की जरूरत है। हम फिर से प्रधानमंत्री के पास जायेंगे।ड्ढr ड्ढr जान बचाने की कीमत छह हाारड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। कोसी क्षेत्र में जलप्रलय में फंसे लोगों की जान बचाने की कीमत छह हजार रुपए! स्थानीय नाविकों ने पानी से डूब रहे लोगों के लिए अंतिम उम्मीद की कीमत खतर के अनुसार तय कर रखी है। पानी की तेज धार में फंसे लोगों के लिए यह कीमत छह हजार रुपए तक है। कम मुश्किल जगहों पर फंसे हैं तो दो से तीन हजार रुपए तो देने ही होंगे। अगर पूर परिवार के साथ हैं तो नाविक कुछ रिबेट देने पर विचार भी करते हैं, लेकिन अकेले हैं तो पूरी कीमत देने की बाध्यता है। मजबूरी में लोग इन नाविकों के हाथों लुटने को विवश हैं। सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और अररिया के विभिन्न हिस्सों में सरकारी नावें कहीं नहीं दिख रहीं। जो दिख भी रही हैं तो वे खतरों का जायजा लेने में ही फंसी हैं। कई नावों पर अधिकारियों व नेताओं का कब्जा है।ड्ढr ड्ढr इन जिलों में नावों की किल्लत के कारण हजारों लोग यहां-वहां फंसे हैं और उन्हें निकालने की कोई कोशिश किसी स्तरर पर नहीं हो पा रही। गिनती की कुछ नावें ही लोगों को बाहर निकालने में लगी हैं।ड्ढr ऐसे में स्थानीय नाविकों ने मौके का जमकर फायदा उठाना शुरू कर दिया है। वे लोगों से ‘जान’ बचाने की पूरी कीमत वसूल रहे हैं। इसके कारण कई जगहों पर नाविकों से बाढ़पीड़ितों की जमकर झड़पें भी हुई हैं। सहरसा में तो हुई हिंसक झड़प में स्थानीय पुलिस प्रशासन तक को हस्तक्षेप करना पड़ा। कई जगहों पर उग्र लोगों ने गुस्से में नावें ही छीन लीं। बाढ़पीड़ित प्रशासन से लगातार नाव मुहैया कराने का अनुरोध कर रहे हैं।ं

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