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गुड गवर्नेस एक् शन में भी दिखें

पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि ‘गुड गवर्नेस’ केवल नारों में नहीं, बल्कि एक्शन में दिखनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेन्द्रमल लोढ़ा ने यह टिप्पणी गुरुवार को राज्य सरकार की एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान की। राज्य सरकार ने एक अर्जी दायर कर बिहार राज्य के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की हड़ताल से संबंधित मामले में गत 7 अगस्त को पारित आदेश को संशोधित करने का अनुरोध अदालत से किया था।ड्ढr ड्ढr अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार ने पिछले साल 18 जुलाई को कर्मचारी महासंघ के साथ जो समझौता किया था उसे एक महीने के भीतर लागू कर। इसी आदेश के बाद विश्वविद्यालयकर्मियों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी थी। राज्य सरकार ने अपनी अर्जी में कहा कि पिछले साल 17 जुलाई को बिहार विधान परिषद के सभापति, मानव संसाधन विभाग के मंत्री, आधा दर्जन एम.एल.सी. तथा कुछ सरकार के अधिकारियों के साथ महासंघ की वार्ता हड़ताल समाप्त कराने को लेकर हुई थी। लेकिन सरकार ने अपनी ओर से समझौता के लिए अधिकृत नहीं किया था। महाधिवक्ता पी.के. शाही ने अदालत को बताया कि अगर शिक्षकेत्तरकर्मियों की सभी मांगों को मान लिया जाय तो सरकार पर डेढ़ सौ करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा और ऐसा करना सरकार के लिए संभव नहीं होगा। उन्होंने अदालत से 7 अगस्त के आदेश को संशोधित करने तथा अनुपालन के लिए कुछ अधिक समय देने का अनुरोध किया। लेकिन अदालत ने हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए मुख्य सचिव को निर्धारित समय सीमा के भीतर अमल करने का निर्देश दिया।ं

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