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बाढ़ग्रस्त इलाकों के पुनर्निर्माण के लिए सर्वदलीय पहल

ोसी की विनाशलीला के खिलाफ सभी राजनीतिक दलों ने एक साथ मिलकर मोर्चा बांधा है। राजनीतिक भेद-भाव से पर हटकर राहत कार्य से लेकर बाढ़ग्रस्त इलाकों के पुनर्निर्माण के लिए सर्वदलीय पहल होगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में तय हुआ कि विधान सभा और विधान परिषद के सभी सदस्य अपने एक-एक महीने का वेतन बाढ़पीड़ितों के लिए देंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि अररिया, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और पूर्णिया में सर्वदलीय निगरानी सह अनुश्रवण समिति बनेगी। इसकी अध्यक्षता उन जिलों के प्रभारी मंत्री करंगे। यह समिति राहत कार्य की मानीटरिंग करगी। प्रत्येक राहत शिविर के लिए हर दल अपना एक प्रतिनिधि देगा और ये प्रतिनिधि शिविर संचालन में मदद करंगे। हर पन्द्रह दिनों के बाद निगरानी समिति की बैठक होगी। अगर कोई दल अपना राहत शिविर चलाना चाहेगा तो वह सभी दलों के समन्वय से चलाएगा। मवेशियों के लिए भी राहत शिविर चलेंगे। चारा की जिम्मेवारी कम्फेड को सौंपी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत कार्य के बाद इन जिलों में पुनर्निर्माण के लिए सर्वदलीय पहल होगी। उधर इस सब के बीच अधिकारियों की समस्या कुछ अलग ही है। यहां माल महाराजा के मिर्जा खेले होरी की तर्ज पर कोसी-पूर्णिया के कई क्षेत्रों में बाढ़पीड़ितों के बीच राहत का श्रेय प्रशासन लेना चाहता है। स्थानीय लोगों द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्यो का श्रेय लेने के लिए प्रशासनिक अधिकारी परशान हैं। ऐसा ही वाकया पूर्णिया में देखने को मिला, जहां बनमनखी के सुमरित उच्च विद्यालय में स्थानीय लोगों द्वारा बाढ़पीड़ितों के लिए खोले गए राहत शिविर में प्रशासनिक अधिकारी धमक गए और अपना बैनर तक टांग दिया। दूसरी तरफ बहुत दिन बाद मधेपुरा को बाढ़ से पाला पड़ा है। शहर के लोगों को कई पीढ़ियों से बाढ़ से लड़ने का अनुभव नहीं है। मधेपुरा में लॉ कालेज के अलावा कोई और ऊंची जगह भी नहीं है। नतीजा यह है संपन्न लोग शहर को खाली कर सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को मधेपुरा में इक्का-दुक्का दुकानें खुली हुई थीं। सभी सड़कें डूबी हुई हैं। दुकानों में भी पानी है।ं

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