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भारतीय उद्योग जगत के मजबूत स्तंभ थे बिड़ला

वरिष्ठ उद्योगपति कृष्ण कुमार बिड़ला का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने न केवल अपने पिता के व्यापार को आगे बढ़ाया, बल्कि शिक्षा तथा अन्य सामाजिक कार्यो से भी जुड़ कर देश हित में ढेरों काम भी किए। बिड़ला को लंबे समय तक चीनी उद्योग का बादशाह माना जाता रहा। उवर्रकों, रसायनों, इंजीनियरिंग, कपड़ा तथा जहाजरानी आदि विभिन्न उद्योगों में उनका दखल था। बिड़ला की प्रमुख कंपनियां हैं जुआरी इंडस्ट्रीज, चंबल फर्टिलाइजर्स, पारादीप फॉस्फेट्स, सतलज इंडस्ट्रीज, बिरला टेक्सटाइल मिल्स, अवध शुगर मिल्स, टेक्समाको, सिमॉन इंडिया, इंडिया स्टीमशिप्स, आईएसजी नोवासाफ्ट्स और हिंदुस्तान टाइम्स मीडिया। उन्होंने लंबे समय तक भारतीय उद्योग जगत के विभिन्न संगठनों के लिए भी काम किया। इस दौरान वे ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कार्मस एंड इंडस्ट्री’(फिी), ‘इंडियन शुगर मिल्स ऐसोसिएशन’ (इस्मा), ‘इंटरनेशनल चैंबर्स ऑफ कामर्स’(आईसीसी) के अध्यक्ष भी रहे। बिड़ला की मौत पर फिी के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि वह एक महान दृष्टा, सांसद और भारतीय व्यापार जगत के अग्रदूत थे। उन्होंने आधुनिक शिक्षण एवं वैज्ञानिक संस्थाओं के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान किया।’’ बिड़ला का जन्म राजस्थान के पिलानी में 12 अक्टूबर 1ो हुआ था। मशहूर उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला उनके पिता थे। उन्होंने प्रख्यात उद्योगपति जेआरडी टाटा के साथ मिलकर ‘बंबई प्लान’ तैयार किया था, जिसमें देश के निर्माण में व्यापार जगत और सरकार की भूमिका का उेख किया गया है। वे लगातार 18 वर्षो तक राज्य सभा के सदस्य रहे। उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का भी निर्वहन किया, राजधानी समेत कई जगहों पर बनाए गए बिड़ला मंदिर इसके उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गत दिसंबर में उनकी आत्मकथा ‘ब्रशेस विद हिस्ट्री’ का लोकार्पण करते हुए कहा था, ‘‘बिड़ला ने हमेशा उन कामों के महत्व को समझा जो हम कर रहे हैं। मैं हमेशा उनके सहयोग की कद्र करता हूं।’’ं

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