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खंडित जनादेश से क्या, इच्छाशक्ित चाहिए

मुख्यमंत्री शिबू सोरेन झारखंड की बदहाली के लिए अब तक की सरकारों की कमजोर इच्छाशक्ति को कारण मानते हैं। वह कहते हैं कि सरकारों की अस्थिरता के पीछे निर्दलीय दोषी नहीं, वे राष्ट्रीय दल जिम्मेदार रहे हैं जो हमेशा एकतरफा शासन चलाते रहे। मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि उग्रवाद को लेकर बेवजह बवेला मचाया जाता है। कभी मुझे भी उग्रवादी-नक्सलवादी कहा गया था। वास्तव में गांव की अभावग्रस्त जनता पर ध्यान देने की जरूरत है। शिबू ने नक्सलियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। शुक्रवार को झारखंड विधानसभा में बहुमत हासिल करने के तुरंत बाद उनसे रू-ब-रू हुए हमारे संवाददाता। झारखंड की हालत आज बदतर है। कैसे सुधारेंगे राय को?ड्ढr मुख्यमंत्री बनकर सत्ता में आ गये हैं। सत्ता में बहुत पावर होता है। उसके उपयोग से काम करेंगे। मुझे मालूम सब है, क्या और कैसे करना चाहिए। क्या आपके दिमाग में कोई रणनीति है पहले से?ड्ढr शासन चलाना कोई पॉलिटिक्स नहीं है, युद्ध नहीं है. काम करना है। इसके लिए यंत्र-तंत्र रखा हुआ है। सिर्फ उसको इंप्लिमेंट करना है। हमारे संविधान ने सब कुछ दे रखा है। झारखंड में निर्दलीय शब्द बहुत कुख्यात हो गया है। अस्थिरता के पीछे निर्दलीय विधायक ही कारण माने जाते रहे हैं। आपकी सरकार भी इन्हीं के समर्थन से बनी है। हमारे प्रजातंत्र के संविधान का तकाजा है कि कोई भी नागरिक चुनाव लड़ सकता है। इसे रोका तो नहीं जा सकता। लेकिन अब तक जिन दलों ने निर्दलीयों के साथ सरकारें बनाईं, विफल रहे.?ड्ढr ऐसा है. निर्दलों को दोष देना अनुचित है! अब तक की सरकारों में एकतरफा राज करने वाले दल थे, उन्हीं से गड़बड़ी होती रही। एकतरफा राज करने वाले कौन थे. राष्ट्रीय दल! इस तरह का एकतरफा राज जब तक होगा, गड़बड़ी और बढ़ेगी। लोग तो कहते हैं, यह नौबत आती है खंडित जनादेश से.?ड्ढr देखिये, उन (सरकारों) में कार्यक्षमता की भी कमी थी। खंडित जनादेश से क्या होता है. इच्छाशक्ित होनी चाहिए। लोकसभा चुनाव आनेवाला है। क्या रणनीति होगी?ड्ढr हम तैयार हैं! यूपीए के साथ हमारा पहले से ही समझौता है। अच्छे नतीजे के लिए सीट बांटकर चुनाव लड़ेंगे। केंद्र की यूपीए सरकार से हमें सहयोग मिलता रहा है। लेकिन, राय में हम (झारखंड मुक्ित मोर्चा) मेजर पार्टी हैं। लोकसभा में भी हमारे 14 एमपी हैं, 13 झारखंड से एक उड़ीसा से। कोई दिक्कत हमको नहीं होगी। राय में उग्रवाद से आप कैसे निबटेंगे?ड्ढr इस पर मैं बार-बार कहता हूं. उग्रवाद के बारे में बोली और मीडिया के माध्यम से हम लोग जितना प्रचार किये हैं, उतना कुछ है ही नहीं! लोग बोलते हैं, जंगल में सब बंदूक लेकर घूमता है. लेकिन किसी ने देखा ही नहीं!. अब आप मुख्यमंत्री हैं। सरकारी बयानों और आंकड़ों को देखकर जवाब देना चाहिए. !ड्ढr क्या बोलें. सुनील महतो की हत्या को लेकर मीडिया ने हमसे सवाल किया था. मैं कैसे बोलता कि उन्हें उग्रवादियों (नक्सलियों) ने मारा!. जबकि, बाद में मैं खुद उस जगह गया था जहां सुनील को मारा गया था। वहीं से मैंने पिछले लोकसभा उपचुनाव की शुरुआत की थी, जब उनकी पत्नी (सुमन महतो) खड़ी हुई। मुझे तो ऐसा कुछ नहीं लगा वहां. वैसे देखिये, अनुसंधान चल रहा है. बहरहाल, यह बताइये कि उग्रवाद से आप कैसे निबटेंगे?ड्ढr देखिये. कोई जादू तो नहीं कि मैं बोल दूं और खत्म हो जाये. समझने का प्रयास तो करिये!. पक्की बात सुन लीजिए। हमें काफी अनुभव है इसका। मुझे भी कभी उग्रवादी और नक्सलवादी कहा गया था. मैं सामना कर चुका हूं इसका। .मैंने एलान किया है कि जो लोग उग्रवादी थ्योरी चलाते हैं वह सामने आयें और हमसे बात करें। भ्रष्टाचार और कुशासन पर कैसे अंकुश लगायेंगे?ड्ढr यह सब भी केवल भाषा और भाषण है!. इच्छाशक्ति हो तो इस पर नियंत्रण करना मुश्किल नहीं है। देखियेगा, विकास का काम स्मूथली होगा। सब ठीक हो जाएगा। कितने दिनों में दिखने लगेगा शिबू का शासन?ड्ढr दिन तो नहीं बता सकता। हां इच्छा है, और सबकी इच्छाशक्ति बढ़ाऊंगा। मैंने अपने मंत्रियों को भी कहना शुरू किया है- हम सब इसी माटी के हैं। काम करो, नहीं तो झारखंड की जनता हम सबको कभी माफ नहीं करेगी। झारखंड में बाहरी-भीतरी का सवाल भी उठता रहा है..ड्ढr यह सवाल कहां से आया। दोनों प्रजातंत्र के अंग हैं। डेढ़ सौ साल से तो यहां मारवाड़ी रह रहे हैं। उससे भी पहले से कोइरी-कुर्मी सब रहता है। ब्राह्मण-राजपूत सब सौ साल से भी यादा समय से रहता है। बाहरी-भीतरी ई सब बकवास है।

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