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सीडी कांड की जांच सरकारी एजेंसी से कराने की अनुशंसा

विधानसभा सीडी कांड की जांच कर रही विशेष समिति के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट स्पीकर आलमगीर आलम को सौंप दी। समिति ने नियुक्ितयों में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी की आशंका व्यक्त की है और इसकी जांच किसी सरकारी एजेंसी से कराने की अनुशंसा की है। समिति का कहना है कि सभा सचिवालय के असहयोग के कारण वह इसकी जांच गहराई से नहीं कर पायी। वह इसकी संपूर्ण जांच के लिए विधानसभा सचिवालय से कई जानकारियां चाह रही थी, जिसे यह कहते हुए देने से इनकार कर दिया गया कि यह विषय स्पीकर के क्षेत्राधिकार का है। विधानसभा सचिवालय ने लिखित रूप में यह भी कहा कि समिति को अधिसूचना में अंकित बिंदुओं पर ही जांच करनी है।ड्ढr स्पीकर ने कहा कि रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। विशेष समिति का गठन 3 अक्टूबर 2007 को किया गया था। राधाकृष्ण किशोर समिति के संयोजक थे, जबकि सुखदेव भगत, रवींद्र नाथ महतो, चितरांन यादव एवं रामचंद्र सिंह इसके सदस्य थे। समिति कुछ वैसे लोगों से पूछताछ करना चाह रही थी, जिन्होंने समिति को सरयू राय के माध्यम से या सीधे तौर पर पत्र सौंप कर नियुक्ितयों में अनियमितता की शिकायत की थी। सभा सचिवालय ने इसपर भी आपत्ति व्यक्त की थी। कहा गया था कि पूछताछ अथवा साक्ष्य के लिए उन्हीं लोगों को बैठक में बुलाया जा सकता है, जिनकी तस्वीर सीडी में दिखाई पड़ रही है। परिणाम स्वरूप समिति इस मामले की गहराई से जांच नहीं कर पायी।ड्ढr समिति ने उस सीडी को भी देखा, जिसे भाजपा विधायक सरयू राय ने स्पीकर को सौंपते हुए नियुक्ितयों में भारी धांधली होने की शिकायत की थी। सीडी में पूर्व सचिव सीताराम साहनी, प्रशाखा पदाधिकारी मो. शमीम तथा दिनचर्या लिपिक बासुकीनाथ पाठक की तस्वीर स्पष्ट दिखाई दे रही थी। समिति की बैठक में इन लोगों ने स्वीकार भी किया कि तस्वीर और आवाज उन्हीं की है। इन लोगों के बीच नियुक्ित के लिए लेनदेन की बातचीत हो रही थी। इस वार्ता में मिथिलेश कुमार मिश्र, निलेश रांन, आशुतोष तिवारी एवं सइद अहमद भी उपस्थित थे।

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  • Web Title: सीडी कांड की जांच सरकारी एजेंसी से कराने की अनुशंसा