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कचचच्चे तेल केचच वर्तमान स्तर से बचेंगे 70,000 कचचरोड़

विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम कुछ नीचे आने से जहां एक तरफ सरकार और तेल कंपनियां राहत की सांसे ले रही हैं वहीं दूसरी तरफ देश का आयात बिल में भी इस साल 70 हजार करोड़ रु. की बचत का अनुमान है। वाणिज्य एवं उद्योग मंडल एसोचैम ने अपने ईको पल्स नामक ताजा सर्वेक्षण में इसका अनुमान लगाते हुए कहा है कि एक समय विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे लेकिन इनमें गिरावट आने के बाद फिलहाल यह 110-120 डॉलर प्रति बैरल के बीच झूल रहे हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक यदि तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो देश का पेट्रोलियम आयात बिल 17 अरब डॉलर यानी करीब 70,000 करोड़ रु. तक कम होगा। सर्वेक्षण में कहा गया है कि यदि कच्चे तेल के दाम 145 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही बने रहते तो इस साल कच्चे तेल के आयात पर ही 125 अरब डॉलर (करीब 5 लाख करोड़ रु.) खर्च करने पड़ते, लेकिन हाल के दिनों में दाम नीचे आने के बाद इस साल तेल आयात बिल घटकर 108 अरब डॉलर (4 लाख 30 हजार करोड़ रु.) रह जाने का अनुमान है। इस प्रकार दाम घटने से इस साल आयात बिल में 70 हजार करोड़ रु. की बचत होगी। सर्वेक्षण में कहा गया है कि यदि चालू वित्त वर्ष की बाकी तीन तिमाहियों में कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहते हैं तो तेल आयात बिल 108 अरब डॉलर के आसपास रहने की संभावना है।

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  • Web Title: कचचच्चे तेल केचच वर्तमान स्तर से बचेंगे 70,000 कचचरोड़