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कहीं प्रसव पीड़ाका रुदन कहीं किसी के खोने का गम

पूर्णिया में लाखों लोग हाारों दर्द। सबकी जुबां पर दर्दभरी व्यथा है। किसी की बहन बाढ़ में फंसी हुई है और पांच दिनों से प्रसव पीड़ा से कराह रही है। लेकिन शासन को यह कराह अब तक सुनाई नहीं पड़ी है। किसी के आठ वर्षीय भाई ने दम तोड़ दिया है। फिर भी उसे लाने कोई नहीं पहुंचा कि दाह संस्कार किया जा सके। कहीं बाढ़ में छत गिर गया है और घर के लोग घायल हो गए हैं। इलाज के लिए तड़प रहे हैं। कई परिवार हैं जो मसिद की मीनार पर लगातार 13 दिनों से बैठें हैं। भूखे-प्यासे जीवन की अंतिम सांसें ले रहे हैं। लेकिन यहां आज तक न तो राहत सामग्री पहंची और न ही इनकी जान बचाने के लिए नाव।ड्ढr ड्ढr पूर्णिया से 40 किलोमीटर दूर जिले की सीमा स्थित भंगहा के आस-पास के करीब दो दर्जन गांवों में ऐसे पचास हाार से अधिक लोग कोसी की विनाशकारी बाढ़ में फंसे हुए हैं। पीड़ित अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहे हैं। कोई सुननेवाला नहीं है। सरकार भले ही राहत के नाम पर अरबों रुपए खर्च करने का दावा करती हो लेकिन इन बाढ़ पीड़ितों को अन्न का एक दाना भी नसीब नहीं हो सका है। मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड़ में 20 हाार से अधिक लोग फंसे हुए हैं। इसमें रानी, प्रतापनगर, कलाहपट्टी डुमरिया, भतनी सहित 17 पंचायत हैं। इसके अलावा सबसे बड़ा प्रखंड कुमारखंड़ में 21 पंचायत है। सिकरहट्टी, रहटा, गंगापुर, बिहारीगंज, लक्ष्मीपुर, ग्वालापाड़ा, सुखासन, बेंगापुल, हनुमानपट्टी, जोरगामा, भतनी पतरहारा, टिकुलिया सहित कई गांवों में आजतक एक भी नाव नहीं गई। इससे यहां के लोगों की अब जीने की उम्मीद भी धीर-धीर खत्म हो चली है। वहीं दूसरी ओर जो लोग किसी तरह से बाढ़ के प्रकोप से बच गए हैं वे टैक्ट्रर, टेम्पो, जीप में सवार होकर अनजाने मुकाम की ओर चल पड़े हैं। पूछा- कहां जा रहे हैं तो कहा- ‘भगवान जहां ले जाए।’ इतने में मीडिया की गाड़ी के पास धंसी हुई आंखें, मुर्झाया चेहरा और लडख़ड़ाती आवाज में लक्ष्मीपुर के भिखारी साह विलाप करने लगे- ‘मेरा आठ साल का भाई मनीष मर गया है।ड्ढr ड्ढr पांच दिनों से दस फीट बाढ़ के पानी से घिर घर में बेबस था। अंतत: दम तोड़ दिया। कोई उसे वहां से लेते आईये।’ वे आगे बोले- ‘जिस दिन बाढ़ आई, मैं अपने दो छोटे भाइयों को लेकर भागा। लेकिन पानी में काफी धार थी कि जिससे आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। फिर मैं दोनों को घर पर ही छोड़कर भाग गया। बाद में बड़े भाई चरितर साह ने मोबाइल पर बताया कि मनीष अब हमलोगों के बीच नहीं रहा। उनका मोबाईल नं. 006446008 है। कोई मेर भाई को वहां से लेते आईये।’ रहटा के संजय मंडल ने बताया कि मेरी बहन पांच दिनों से प्रसव पीड़ा से कराह रही है, लेकिन कोई नाव तक नहीं पहुंच सकी है। इन गांवों में फंसे अपने रिश्तेदारों को बाढ़ से बचाने के लिए भंगहा तक तो लोग पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां अपने आप को असहाय और निरुपाय महसूस करते हैं क्योंकि भंगहा से ही मधेपुरा और सुपौल तक का मुख्य मार्ग एनएच 107 बाढ़ में डूबा हुआ है।

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  • Web Title: कहीं प्रसव पीड़ाका रुदन कहीं किसी के खोने का गम