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'टेलीफोन टैपिंग की साजिश में सरकार का हाथ नहीं'

'टेलीफोन टैपिंग की साजिश में सरकार का हाथ नहीं'

राज्यसभा में आज विपक्षी सदस्यों ने विपक्ष के नेता अरुण जेटली एवं अन्य सांसदों के टेलीफोन टैप किए जाने के मामले पर अपना तीव्र आक्रोश जाहिर करते हुए इस घटना की साजिश का पता लगाने की एक स्वर में मांग की और कहा कि यह सांसदों के विशेषाधिकार के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा मामला है, इसलिए सभापति की अनुमति के बगैर किसी सदस्य का टेलीफोन टैप नहीं होना चाहिए।

इसके जवाब में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि सरकार इस घटना की जांच कर रही है, लेकिन इस साजिश के पीछे सरकार का कोई हाथ नहीं है। हम इस बात का पता लगाएंगे कि आखिर राजधानी की एक निजी गुप्तचर एजेंसी जेटली के टेलीफोन कॉल का विवरण गोपनीय तरीके से किसके लिए उपलब्ध करा रही थी।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस बात पर भी विचार करेगी कि सांसदों का टेलीफोन टैप बिना सभापति या अध्यक्ष की अनुमति के न हो। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि सरकार एक निश्चित समय सीमा के भीतर इस साजिश का पता लगाकर सदन को इसके निष्कर्षों से अवगत कराए, पर शिंदे ने कहा कि अभी समय सीमा तय करना उनके लिए संभव नहीं होगा, पर हम इस साजिश का जरूर पता लगाएंगे और जितना जल्दी संभव हो सकेगा, हम सदन को सूचित करेंगे।

विपक्षी सदस्यों ने गृहमंत्री से यह भी जानना चाहा कि क्या संसद के 100 सांसदों के टेलीफोन टैप किए जा रहे हैं, पर शिंदे ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया। टेलीफोन टैप का मामला 27 फरवरी को राज्यसभा में उठाया था और तब विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर गृहमंत्री को जवाब देने की मांग की थी।

शिंदे ने आज अपने वक्तव्य में जेटली के टेलीफोन टैप के मामले में कहा कि विपक्ष के नेता का कोई टेलीफोन टैप नहीं किया जा रहा था, बल्कि एक प्राइवेट गुप्तचर एजेंसी ने एक सिपाही के माध्यम से उनके फोन कॉल के विवरण का पता लगाया था और इस आरोप में अरविंद कुमार डबास नामक उस सिपाही को गिरफ्तार कर लिया गया, जो संसद मार्ग थाने में तैनात था।

उन्होंने बताया कि गाजियाबाद के शालीमार गार्डन स्थित डिटेक्टिव एजेंसी इंडिया नामक प्राइवेट गुप्तचर एजेंसी नीरज नायर नाम का आदमी चलाता था और अरविंद कुमार डबास उसके लिए काम करता था। अरविंद कुमार ने नीरज नायर को 10-15 अवसरों पर विभिन्न लोगों के कॉल उपलब्ध कराए थे और इसके बदले वह प्रति ग्राहक 200 रुपये के अलावा हर कॉल पर 1500 रुपये लेता था।

नीरज नायर यह कॉल विवरण उत्तम नगर के निवासी नीतीश को भेजता था, जो डॉक्टर अनुराग सिंह की कनॉट प्लेस में स्थित वी डिटेक्ट नामक जासूसी एजेंसी में काम करता था। नीरज नायर को 16 फरवरी को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। अरविंद कुमार और नीरज नायर के खुलासे के बाद नीतीश और अनुराग सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

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