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बिहार बाढ़ : कोसी का तांडव जारी

बिहार में कोसी नदी का तांडव मंगलवार को लगातार सोलहवें दिन भी जारी रहा। बाढ़ प्रभावित मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया और फारबिसगंज के विभिन्न इलाकों में कोसी लगातार कहर बरपा रही है। मधेपुरा जिले में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए सेना की एक और टुकड़ी मधेपुरा भेजी गई है। मधेपुरा शहर और यहां के विभिन्न प्रखंडों में बाढ़ ने भयानक तबाही मचा रखी है। सहरसा जिले के पांच प्रखंडों की 37 पंचायतें पूरी तरह तथा 14 पंचायतें आंशिक रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं। उधर, पूर्णिया जिले में कोसी का पानी कुछ नए इलाकों में प्रवेश कर गया है। पूर्णिया-बनमनखी रेलमार्ग पर बाढ़ का पानी आ जाने के कारण इस पर आवागमन रोक दिया गया है। अररिया जिले के नरपतगंज, भरगामा, रानीगंज व फारबिसगंज में बाढ़ की स्थिति यथावत बनी हुई है। सुपौल के त्रिवेणीगंज और छातापुर में अभी भी कुछ लोग बाढ़ में बुरी तरह फंसे हुए हैं। त्रिवेणीगंज के कई और नए इलाके बाढ़ का पानी आ गया है। उधर, कटिहार में कोसी का पानी तेजी से उतरा है। जल संसाधन विभाग के सूत्रों की माने तो कुरसेला के निकट कोसी की नई धारा को गंगा में मिलने से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में जलस्तर में कमी आई है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव आर. के. सिंह ने आईएएनएस को बताया, ‘‘अब हमारे पास प्रतिदिन 50 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की क्षमता हो गई है।’’ उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि अगले तीन दिनों में यह मिशन पूरा हो जाएगा। इलाके में सेना और नौसेना की टुकड़ियों के अलावा सेना की 10 और टुकड़ियां मांगी गई है। सिंह के मुताबिक खाने के पैकेट गिराने के काम में नौ हेलीकाप्टर लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार दोपहर के बाद से इनकी संख्या 12 हो जाएगी। उन्होंने बताया कि भोजन पैकिंग के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार से विशेष बैग मंगवाये गए हैं। सिंह ने बताया कि अभी बाढ़ प्रभावित इलाकों में 200 से ज्यादा राहत शिविर चलाए जा रहे हैं। राहत शिविरों के लिए 2600 तंबू पहुंच चुके हैं तथा 5500 अतिरिक्त तंबू जल्द ही पहुंच जायेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पटना या भागलपुर में राहत शिविर नहीं खोले जाएंगे।

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