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रिटेल इंडस्ट्री बनता लाउंड्री व्यवसाय

शायद ही किसी ने सोचा होगा कि लाउंड्री और ड्राईक्लीनिंग व्यवसाय एक दिन संगठित व्यवसाय का रूप धारण कर लेगा। करोड़ों रु. के निवेश और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित वॉश केयर सेंटरों ने इसे भी रिटेल इंडस्ट्री बना दिया है। रिसर्च फर्म एसी नीलसन की एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लाउंड्री और ड्राईक्लीनिंग से जुड़ी 12,000 फर्म रािस्टर्ड हैं। ग्राहकों को सुविधा देने के क्रम में शुरू हुआ पिक एंड ड्रॉप का काम धीर-धीर हाईक्लास सुविधाओं में तब्दील होता जा रहा है। बड़ी कंपनियां फ्रेंचाइजी व रिटेल सेंटर के मार्फत इस कारोबार को और आगे ले जा रही हैं। हाल ही में ड्राईक्लीन कारोबार से जुड़ी कंपनी डायमंड फैबकेयर प्रा. लि. ने घोषणा की है कि वह दिल्ली व एनसीआर में मार्च 200तक 100 रिटेल आउटलेट्स स्थापित करगी। इसमें करीब 20 करोड़ रु. का निवेश किया जाएगा। कंपनी के यह आउटलेट्स वार्डरोब ब्रांड के तहत लांच किए जाएंगे। कंपनी के मुताबिक उनकी योजना आने वाले 3-5 वर्षो में देशभर में 1,500 करोड़ रु. के निवेश से आउटलेट्स खोलने की है। साथ ही उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जगह-ागह पिक एंड ड्रॉप सेंटर और सेंट्रल सप्लाई चेन का निर्माण भी किया जाएगा। कंपनी ने इस काम में एडवांस टेक्नोलॉजी का प्रयोग करने के लिए आस्ट्रेलियाई कंपनी ब्राउन गॉज से हाथ मिलाया है। ब्राउन गॉज इस क्षेत्र की अनुभवी व अग्रणी कंपनी के तौर पर जानी जाती है। इसी तर्ज पर शू-लाउंड्री भी उद्योग की शक्ल ले रहा है। हालांकि यह अभी मुम्बई और उसके आसपास तक के क्षेत्र में सीमित है। महंगे जूतों के रख-रखाव से शुरू हुए इस व्यवसाय में आज मॉडर्न इक्िवपमेंट भी शामिल हो चुके हैं।ं

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