DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

प्रभावित इलाकों में बैंकिंग सेवा ठप नहीं होने दी जाएगी

भारतीय रिार्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक (ग्रामीण आयोजना एवं ऋण विभाग) बी पी विजेन्द्र ने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में किसी भी हालत में बैंकिंग व्यवस्था को ठप नहीं होने दिया जायेगा। करंसी की कमी न हो इसके लिए जरूरत पड़ने पर विमान से नोट पहुंचाये जायेंगे। बुधवार को प्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे बाढ़ पीड़ितों की मदद में सरकार के कदम से कदम मिलाकर चलें। इसकी मॉनीटरिंग उच्च स्तर पर की जा रही है। रिार्व बैंक के उप गवर्नर ने राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी से बात की है।ड्ढr ड्ढr वे खुद भी मुख्य सचिव से बात कर चुके हैं। राज्य सरकार से यह मांग की गई है कि आपदा प्रबंधन समिति में रिार्व बैंक, एसएलबीसी और नाबार्ड को भी रखा जाय। सरकार इसपर सहमत हो गई है। श्री विजेन्द्र ने कहा कि व्यावसायिक बैंकों की 46 और गा्रमीण बैंकों की 35 शाखाएं आज भी डूबी हैं। निर्देश दिया गया है कि वे तीस दिन तक के लिए नये स्थान से अपनी शाखा को संचालित कर सकते हैं। सेटेलाईट कार्यालय और एक्टेंशन काउन्टर भी खोले जा सकते हैं। क्िलयरिंग के नियमों को कुछ शिथिल किया गया है। जो एटीएम पानी में हैं और ग्राहक वहां तक नहीं पहुंच पाते हैं, मोबाइल एटीएम के साथ बैंक ही अपने ग्राहकों के पास पहुंचेगा। ऋण लेने में मार्जिन मनी की बाध्यता भी समाप्त की गई है तो नया खाता खोलने के लिए पहचान करने की शर्त को भी सरल किया गया है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की मदद में बैंकों का योगदान पानी उतरने के बाद अधिक होता है, बावजूद प्राथमिकता अनुसार काम करने का निर्देश दिया गया है। संवाददाता सम्मेलन में रिार्व बैंक के महाप्रबंधक एम एस सोय भी थे। अफसरों का बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में बुरा हालड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में अफसरों का हाल बुरा है। सुपौल के डीएम डा. एन सरवन कुमार वाहवाही बटोर रहे हैं तो मधेपुरा के डीएम राजेश कुमार का नाम लेते ही बाढ़पीड़ितों की पीड़ा और बढ़ जाती है। आपदा के समय भी उनपर ऐसे आरोप लग रहे हैं, जिन्हें प्रकाशित नहीं किया जा सकता है। मधेपुरा के डीएम पर बाढ़पीड़ितों का खुला आरोप है कि उन्होंने वक्त पर लोगों की मदद नहीं की। उनके सरकारी आवास में भी बाढ़ का पानी घुसा। वे खुद सुरक्षित स्थान पर चले गए। उस दौरान बाढ़ के बदले उन्होंने दूसरी संचिकाएं निबटाई।ड्ढr ड्ढr जिले के हाकिम का ऐसा हाल था तो मातहतों को कौन पूछता। नीचे के अधिकारी भी सुरक्षित स्थानों पर चले गए। जिले में बचाव का काम 28 सितम्बर के बाद ही शुरु हो पाया। तब तक मधेपुरा से सटे गुमटी धार में लाशें तैरने लगी थीं। सहरसा के डीएम आर लक्ष्मण ने भी शुरुआती दिनों में सुस्ती ही दिखाई। 2सितम्बर की रात तक सहरसा की सभी सड़कें विस्थापितों से पट गई थीं। तक तक शहर में दो-तीन निजी और एक सरकारी शिविर खुल पाए थे। यह खबर मुख्यमंत्री तक पहुंची और अगले दिन कई सरकारी भवन पीड़ितों के लिए खोल दिए गए। मंगलवार को सहरसा के डीडीसी ने निजी शिविरों में बैनर लगाकर सरकार की ओर से खाद्यान्न देने की कोशिश की। मगर कुछ शिविरों ने इसे लेने से इंकार कर दिया। जिला प्रशासन से शिविर के आयोजकों ने मेडिकल शिविर की मांग की। एक शिविर के संचालक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि हमार यहां मेडिकल कैंप का बैनर लगा दिया गया है। डाक्टर और दवा नदारद है। यह शिविर सरकारी गर्ल्स हाई स्कूल में है। सिर्फ सुपौल के डीएम डा. एन सरवन कुमार के काम की तारीफ हो रही है। उन्हें समस्तीपुर जिले में बाढ़ राहत का अनुभव था। यह अनुभव यहां काम आ रहा है। डा. कुमार सिर्फ मातहतों पर निर्भर नहीं हैं। वे खुद दिन-रात एक कर हरसंभव सहायता की कोशिश कर रहे हैं। सुपौल जिले के शिविरों में डाक्टर भी हैं और रहने का भी अच्छा इंतजाम है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: प्रभावित इलाकों में बैंकिंग सेवा ठप नहीं होने दी जाएगी