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मधेपुरा लौटने लगे लोग

ोसी क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त इलाके में जलस्तर लगातार घट रहा है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी हाारों लोगों के फंसे होने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पानी घटते ही मधेपुरा जिले में लोगों का लौटना शुरू हो गया है। बुधवार को हाारों लोग शहर की ओर आते दिखे। लेकिन कुछ ऐसे भी जिनके चेहर का दर्द साफ दिख रहा था। आखिर बाढ़ ने अपनों को छीन जो लिया। सहरसा के बाढ़ग्रस्त सोनवर्षा, पतरघट, सौर बाजार प्रखंडों में भी पानी आधा से एक फीट घटा है।ड्ढr ड्ढr वहीं सुपौल के वीरपुर, छातापुर, प्रतापगंज प्रखंडों में भी डेढ़ से दो फीट पानी घटा है। बाढ़ के पानी में डूबने से सहरसा जिले के सितुआहा गांव की दो युवतियों तथा छातापुर में महिला सहित दो के मरने की खबर है। छातापुर के समीप बुधवार की शाम सेना की एक नाव पलट जाने से चार लोग बह गये। इस दुर्घटना में राघोपुर के जदयू विधायक नीरा कुमार बब्लू लोगों को बचाने में गंभीर रूप से जख्मी हो गये। इस बीच राहत-बचाव कार्य से जुड़े तमाम सरकारी विभागों और कार्यालयों में छुट्टियां रद्द कर दी गयी है। कैबिनेट विभाग के प्रधान सचिव गिरीश शंकर ने बताया कि युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य के लिए अवकाश के दिन भी संबंधित कार्यालय खुले रहेंगे। बुधवार को सहरसा-मधेपुरा रलखंड पर सहरसा से मिठाई स्टेशन तक रल सेवा चालू कर दी गयी। लेकिन सहरसा-महेशखूंट पथ पर पानी का बहाव जारी है। पूर्णिया में बाढ़ ने तेवर बदल कर पश्चिमी व दक्षिणी इलाकों में तांडव शुरू कर दिया है।ड्ढr अररिया में बाढ़ का पानी घटते ही सड़ांध शुरू हो गया है जिससे महामारी फैलने की आशंका है। कटिहार के पास नदियों का जलस्तर घटने से फिलहाल बाढ़ का खतरा टलता नजर आ रहा है। नवगछिया में बुधवार को सहाा बांध टूट जाने से खरीक प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। नवगछिया बाजार पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज प्रखंड के बंगरा व पहाड़पुर में गंडक तटबंध पर तेजी से कटाव हो रहा है। कटरा प्रखंड के बररी व सोहागपुर में बागमती के जमींदारी बांध पर कटाव तेज हो गया है। कोसी का कहर झेल रहे मधेपुरा, अररिया, सुपौल, सहरसा और पूर्णिया में अब बाढ़प्रभावितों की संख्या बढ़कर 24.23 लाख हो गयी है। राहत व बचाव के लिए रलवे अबतक 163 विशेष रिलीफ ट्रनें चला चुकी है। इसके माध्यम से 2 लाख 47 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इस समय कोसी क्षेत्र के बाढ़पीड़ितों के लिए रलवे द्वारा औसतन 32 ट्रनें हर रोज चलाई जा रही हैं।

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