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एनएसजी की बैठक में कई देशों की आपत्ति बरकरार

भारत को परमाणु व्यापार के लिए बिना शर्त छूट दिए जाने के मसले पर परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की विएना में गुरुवार को शुरू हुई दो दिवसीय बैठक में गहन विचार विमर्श जारी है। एनएसजी के कुछ सदस्य देशों ने भारत को छूट दिए जाने के बारे में अमेरिका की आेर से पेश संशोधित मसौदे पर प्रतिक्रिया में कहा कि यह संशोधन भारत द्वारा भविष्य में परमाणु परीक्षण की उनकी चिंताआें का निराकरण नहीं करता लिहाजा इस बारे में उन्हें ठोस आश्वासन चाहिए। एनएसजी देशों का कहना था कि यादा जरूरी यह है कि अमेरिका इस बारे में भारत से आश्वासन हासिल करने की बजाए एनएसजी के सदस्य देशों को आश्वस्त करे। मामले की अहमियत को देखते हुए अमेरिका ने एनएसजी में भारत के पक्ष में समर्थन जुटाने की कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं और इसके तहत ही अपने सहायक विदेश मंत्री विलियम बर्न्‍स को एनएसजी बैठक में शिरकत करने के लिए भेजा है। अमेरिका की इन कोशिशों पर बैठक में मौजूद एक राजनयिक ने कहा कि जो देश पहले भारत को छूट नहीं देने पर अड़े थे उनका नजरिया अब कुछ शिथिल पड़ा है और जापान, कनाडा की आेर से विरोध अब नहीं के बराबर रह गया है। लेकिन एक दूसरे राजनयिक का कहना था कि आयरलैंड, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रिया, न्यूजीलैंड, नार्वे और नीदरलैंड अभी भी इस बात पर अड़े हैं कि भारत जब तक परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करता उसे परमाणु व्यापार की छूट नहीं मिलनी चाहिए। ऐसी आशंका है कि इस बैठक में भी भारत के मसले पर कोई आमसहमति नहीं बन पाएगी लिहाजा महीने के आखिर में एनएसजी की एक और बैठक बुलानी पडेगी। इस बीच अमेरिकी सरकार में इस बात को लेकर चितां बढती जा रही है कि नंवबर में समाप्त हो रहे बुश सरकार के कार्यकाल के पहले अगर एनएसजी की आेर से हरी झंडी नहीं मिली तो परमाणु समझौते का भविष्य अधर में लटक जाएगा। उधर भारत ने एनएसजी से छूट हासिल करने के लिए अपनी परमाणु रणनीति में किसी तरह के व्यापक बदलाव से साफ इन्कार किया है। जबकि एनएसजी इस बारे में पूरी तरह आश्वस्त होना चाहता है कि परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाला भारत भविष्य मंे परमाणु परीक्षण नहीं करेगा और इसीलिए सदस्य देश यह चाहते हैं कि समझौते में यह प्रावधान जोड़ा जाए कि भविष्य में परमाणु परीक्षण करने पर भारत के साथ परमाणु व्यापार तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाएगा। हालांकि अमेरिका लगातार यह कह रहा है कि भारत की नीयत इस बारे में साफ है और उसने परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक रोक लगा रखी है लेकिन एनएसजी को इस पर भरोसा नहीं है।

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  • Web Title: एनएसजी के कई देशों की आपत्ति बरकरार