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हड़ताली अड़े,चेतावनी बेअसर

नो वर्क, नो पे लागू कर हड़तालियों को वेतन नहीं देने की चेतावनी के बाद भी गुरुवार को सचिवालय संयुक्त संवर्ग के कर्मचारी-अधिकारी काम पर नहीं लौटे। 45 दिन से चल रही हड़ताल पर सरकार की धमकी का असर नहीं पड़ा, बल्कि निकट भविष्य में सेवानिवृत्ति के कारण हड़ताल पर नहीं जानेवाले कर्मचारी-अधिकारी भी आज सरकारी धमकी के खिलाफ काम छोड़ कर हड़तालियों के साथ हो गये। चार सितंबर को सरकार की नीतियों के खिलाफ कर्मचारियों ने फिर जोरदार प्रदर्शन किया। देर शाम सचिवालय सेवा संघ की अपात बैठक में हड़ताल पर डटे रहने का फैसला लिया गया।ड्ढr सचिवालय सेवा संघ ने कहा है कि जब तक मांगों की पूर्ति के लिए सरकार सम्मानजनक समझौता नहीं करगी, काम पर नहीं लौटेंगे। सरकार की चेतावनी के बाद भी एकाुट होकर हड़ताल पर डटे रहने से सरकार की परशानी बढ़ गयी है। गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन एवं नेपाल हाउस के सामने कर्मचारी नेताओं ने हड़तालियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार में बैठे कुछ लोग सहायक संवर्ग के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। वर्तमान सरकार से उन्हें सम्मानजनक सहमति की उम्मीद है।ड्ढr सरकार को तथ्यों पर गौर करना चाहिए : महासचिवड्ढr सचिवालय सेवा संघ के महासचिव दयानंद चौधरी का कहना है कि जब तक सरकार कर्मचारी हित में वार्ता के लिए तैयार नहीं होगी, तब तक राज्य का कामकाज तेजी से आगे नहीं बढ़ सकेगा। सरकार में बैठे लोग सचिवालय सेवा संघ की मांगों से सहमति जताते हैं, लेकिन जब निर्णायक दौर आता है तो बात बिगड़ जाती है। इसके पीछे तथ्यों पर गौर करना होगा। उन्होंने कहा कि विवश होकर हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा है। कर्मचारी के सामान्य हितों की पूरी अनदेखी हुई है। प्रोन्नति के बाद भी वेतनमान बढोत्तरी का लाभ नहीं दिया जाना कहीं से उचित नहीं है। इस मांग के प्रति भी सरकार का नजरिया सार्थक नहीं लगता है। सरकार के साथ काम करनेवाले कर्मचारी को प्रतिद्वंद्वी मानकर देय सुविधा से वंचित रखना गलत है।ड्ढr हक ही तो मांग रहे हैं: उपाध्यक्षड्ढr संघ के उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता ध्रुव प्रसाद का कहना है कि हड़ताली वही मांग रहे हैं, जिस पर उनका हक है और सरकार को पहले ही उसे दे देना चाहिए। पिछले तीन वर्षो से समय-समय पर पूर्व में हुए समझौते को लागू करने के लिए सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है। आग्रह करने के बाद भी जब सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाये, तो काला बिल्ले लगाने, प्रदर्शन एवं सामूहिक अवकाश पर जाने जसे कदम उठाये गये। संकल्प पर अमल हो : उपाध्यक्षड्ढr संघ के उपाध्यक्ष सदन प्रसाद का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के साथ केंद्र के अनुरूप हु-ब-हू वेतनमान, सेवा शर्त एवं अन्य सुविधा देने का समझौता है। इसके लिए संकल्प भी जारी किया जा चुका है। लेकिन उस पर पूरी तरह से अब तक अमल नहीं किया गया है। केंद्रीय पैटर्न पर हु-ब-हू सचिवालय सेवा लागू कराने की मांग पर जब किसी प्रकार की सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन करना पड़ा।ड्ढr भेदभाव बर्दाश्त नहीं : संयुक्त सचिवड्ढr संघ के संयुक्त सचिव विक्रमा राम ने सरकार से हठधर्मिता त्याग कर हड़तालियों की मांग मानने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि जब सरकार केंद्रीय पैटर्न पर सचिवालय सेवा गठन करने का संकल्प जारी कर चुकी है, तो उसे अमल में नहीं लाना कहां से उचित है। दूसर संवर्ग का पद सचिवालय में चिह्नित कर दिया गया है और सचिवालय के लोगों का ही पद चिह्नित करने में सरकार विलंब कर रही है।ड्ढr स्थिति स्पष्ट हो: सदस्यड्ढr कार्यकारिणी सदस्य अविनाशचंद्र ठाकुर का कहना है कि राज्य के मुख्य सचिव फाइल में लिखते हैं कि सरकार केंद्रीय सचिवालय के अनुरूप सचिवालय सेवा का गठन करने के लिए वचनबद्ध है। फिर भी इसे बनाने में क्यों विलंब हो रहा है, इस पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सीएम से हड़तालियों को काफी उम्मीद है। जिला और प्रखंडों में भी पड़ रहा है असरसचिवालय सहायक संयुक्त संवर्ग की हड़ताल का मामला एकदम उलझता जा रहा है। 45 दिन से जारी हड़ताल से सरकार का कामकाज प्रभावित है। सचिवालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। इसका असर अब जिलों तथा प्रखंड स्तर पर भी पड़ने लगा है। हड़तालियों की मांगों को लेकर इतने पेंच पैदा हो गये हैं, कि अब सरकार की दृढ़ इच्छा शक्ित से ही यह मामला सुलझ सकता है।ड्ढr हड़ताल समाप्त कराने के लिए सरकार को कुछ ऐसे निष्पक्ष अधिकारियों को आगे लाना होगा, जो राज्य हित में प्रभावी भूमिका अदा कर सकें। राज्य प्रशासनिक सेवा और सचिवालय सेवा के कर्मचारियों के बीच सच्चे अर्थ में सेतु बन सकें। न्यायपूर्ण फामरूला बना सकें। काम पर लौटें: सीएमड्ढr मुख्यमंत्री शिबू सोरन सचिवालय कर्मचारियों का हड़ताल खत्म कराने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि वे कर्मचारियों की मांगों से वाकिफ हैं। इसी वजह से सीएम बनते ही वह उनसे मिलने सचिवालय पहुंचे। उनकी समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रियों की कमेटी बनायी गयी है। कमेटी ने उनसे बात भी की। मुख्यमंत्री ने सचिवालय कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने का आग्रह किया है। काम पर लौटने के बाद ही उनसे बातचीत होगी। कामकाज शुरू होने पर ही समस्या का समाधान होगा। ड्डं

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